# नौकरी या व्‍यापार

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- Published: 2026-08-18T22:38:59+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

अपने जातकों में मैं तीन तरह की स्थितियां स्‍पष्‍ट तौर पर देखता हूं, एक वे जातक हैं
जो व्‍यापार ही करना चाहते हैं, अगर उन्‍हें बहुत अच्‍छी नौकरी भी मिल जाए तो वह उसे
नहीं करना चाहेंगे, उनके लिए व्‍यापार ही जीवन जीने का सर्वश्रेष्‍ठ विकल्‍प है। दूसरे
वे जातक हैं जिनकी पारिवारिक पृष्‍ठभूमि व्‍यापार की होते हुए भी वे नौकरी ही करना 
चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि नौकरी वे कमतर स्थिति में करते हैं, परिवार का व्‍यापार 
जिला या राज्‍य स्‍तर का होता है और जातक स्‍वयं अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर अच्‍छी नौकरी
कर रहा होता है। तीसरे वे जातक होते हैं जो न नौकरी करते हैं और न व्‍यापार करते हैं,
अपनी आय के पुख्‍ता साधन बनाकर रखते हैं और उसी अवस्‍था में पूरा जीवन निकाल देते हैं।

ज्‍योतिषी के पास आने वाले जातक मुख्‍य रूप से दो प्रकार के प्रश्‍न लेकर आते हैं नौकरी
होगी या व्‍यापार होगा। ज्‍योतिषीय दृष्टिकोण से छठे भाव से नौकरी देखी जाती है और 
सप्‍तम भाव से व्‍यापार। छठा भाव मूल रूप से रोग, ऋण और शत्रु का होता है और इसके साथ
ही इसे भृत्‍य भाव भी कहा जाता है, अर्थात यदि कोई जातक शुल्‍क लेकर सेवा करता है तो
उसे नौकरी करना कहते हैं। जिस जातक की पत्रिका में दसवें भाव का संबंध छठे भाव से बन
रहा हो, वह जातक नौकरी अवश्‍य करेगा। इसी प्रकार जिस जातक की पत्रिका में दसवें भाव
का संबंध सप्‍तम भाव से होगा, वह जातक व्‍यापार अवश्‍य करेगा। अब स्‍पेक्‍ट्रम में 
आगे और विस्‍तार इस प्रकार होता है कि कुछ जातक नौकरी के साथ व्‍यापार करते हैं और 
कुछ जातक अपने व्‍यापार से भी नौकरी की तरह तनख्‍वाह लेते हैं। कुछ जातक शुरूआती दौर
में नौकरी करते हैं और बाद में व्‍यापार में आते हैं और कुछ शुरूआत वर्षों में व्‍यापार
करने के बाद बाद में नौकरी में आ जाते हैं।

ये सभी वैरिएशन षष्‍ठम, सप्‍तम और दशम भाव की राशि, राशि अधिपति की स्थिति, इनके आपसी
संबंध के अनुसार बदलते रहते हैं। इसके साथ ही दशाक्रम भी महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।
नौकरी से व्‍यापार और व्‍यापार से नौकरी के बीच स्विच करवाने में राहु की सबसे महत्‍वपूर्ण
भूमिका होती है। अगले लेख में हम बात करेंगे कि ज्‍योतिषीय कोण से व्‍यापार कितने तरह
के होते हैं…

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