# रूलिंग प्लेनेट – केपी पद्वति का चमत्कार ruling planet

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- Published: 2015-11-05T20:04:09+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

## रूलिंग प्लेनेट – केपी पद्वति का चमत्कार ruling planet

रूलिंग प्लेनेट केपी पद्वति का एक ऐसा चमत्कार है, जो ऐसा काम करता है, जिसे कोई विद्या
नहीं कर सकती। क्या आप किसी ऐसे ज्योतिषी से मिले हैं, जो यह बता सकता हो कि ट्रेन 
किसी स्टेशन पर निर्धारित समय से पहले आएगी या बाद में?

बिजली सप्लाई ठीक कितने बजे आएगी? आपके दोस्त ने आपके घर आने का जो टाइम दिया है, क्या
वह ठीक उसी टाइम पर आएगा या नहीं, आएगा तो ठीक कितने बजे आएगा।

आज आप जहां निकले हैं, वहां ठीक कितने बजे पहुंचेंगे। यदि आप इतना सटीक बताने वाले 
ज्योतिषी से नहीं मिले हैं, तो सचमुच आपका किसी केपी ज्योतिषी से पाला नहीं पड़ा है।

क्योंकि कृष्णमूर्ति पद्वति पर काम करने वाले ज्योतिषियों के लिए तो इतना सटीक बताना
बायें हाथ का खेल है। आपको समझाते हैं कि रूलिंग प्लेटनेट या शासक ग्रह कैसे काम करते
हैं।

शासक ग्रहों का जादू

शासक ग्रह निकालने के नियम कुछ इस तरह हैं-
 1–प्रश्न के समय कौन सी लग्न चल रही है,
यानि लग्न स्वामी। 2–प्रश्न के समय चंद्र स्वामी और उसका नक्षत्र स्वामी। 3–लग्न का
नक्षत्र 4 –वारेश

पूज्यनीय गुरुजी श्री कृष्णमूर्ति जी ने हर घटना का सूक्ष्मता से जवाब पाने के लिए 
बारह राशियों के 27 नक्षत्रों का कुल 249 उपनक्षत्रों में विभाजन किया है, जिससे हर
घटना का काल निर्णय आसानी से पता लगाया जा सके। 13 नवंबर 2012 की बात है।

रात्रि में दिल्ली से मैं अपने घर को निकला। जो बिहार राज्य में है। ट्रेन काफी देरी
से चल रही थी और इसके और विलंबित होने की आशंका थी। रास्ते में मेरे काफी क्लाइंट्स
की क़ॉल आ रही थीं और मैं मोबाइल पर ही सबको समाधान दे रहा था। इससे मेरी सीट के बराबर
बैठे सह यात्रियों को आभास हो गया था कि मैं एक ज्योतिषी हूं।

14 नवंबर की शाम को 3:28 बजे थे और ट्रेन मुगलसराय स्टेशन पहुंचने वाली थी। तभी पास
में बैठे एक महिला सहयात्री ने पूछा कि ट्रेन गया जंक्शन पर कब पहुंचेगी। उसने बताया
कि उसे पटना जाना है और उसके पिता गया स्टेशन पर काफी देर से उसका इंतजार कर रहे हैं।
वह बहुत परेशान लग रही थी।

मैंने उस महिला से कहा कि आप परेशान न हों, मैं आपको अभी बता देता हूं कि गया स्टेशन
पर ट्रेन ठीक कितने बजे पहुंचेगी। इतना कहने के बाद मैंने शासक ग्रह निकाले, जो इस 
प्रकार थे-

लग्न राशि मीन-गुरु
 लग्न नक्षत्र-बुध चंद्र राशि-वृश्चिक-मंगल चंद्र नक्षत्र-शनि उप
नक्षत्र-राहु दिन-बुध

मंगल की वृश्चिक राशि में राहु है, इसलिए राहु भी शासक ग्रहों में शामिल हो गया है।
प्रश्न के समय मीन लग्न 28 डिग्री 23 मिनट पर है। मीन लग्न के बाद मेष लग्न आएगी। मेष
लग्न में केतु, शुक्र व सूर्य के नक्षत्र आते हैं। ये तीनों हमारे शासक ग्रहों में 
शामिल नहीं हैं, इसलिए मेष लग्न के समय में ट्रेन गया नहीं पहुंचेगी, यह तय था।

इसके बाद वृष लग्न ली, इसका स्वामी शुक्र भी हमारे शासक ग्रहों में नहीं है, इसलिए 
इससे आगे चले। इसके बाद मिथुन लग्न आती है। मिथुन राशि में मंगल, राहु और गुरु के नक्षत्र
आते हैं। मिथुन लग्न (राशि) में मंगल के नक्षत्र में बुध, केतु, शुक्र, सूर्य और चंद्र
के उपस्वामी आते हैं। बुध को हम दो बार नहीं ले सकते।

शेष उपस्वामी हमारे शासक ग्रहों में नहीं हैं। इसके बाद राहु का नक्षत्र आएगा, जो हमारे
शासक ग्रहों में है और जिसमें गुरु का उपनक्षत्र आता है। यानि कि मिथुन लग्न जब आठ 
डिग्री की होगी, तब ट्रेन गया स्टेशन पहुंचनी चाहिए। इस तरह पूछे गए प्रश्न के समय 
में अब तक यानि मिथुन की आठ डिग्री भी जोड़ दीं।

यह इस तरह जोड़ी गयीं-
 मीन-1 डिग्री 37 मिनट मेष की 30 डिग्री वृष की 30 डिग्री मिथुन
की 8 डिग्री 40 मिनट

कुल-70 डिग्री 17 मिनट
 एक डिग्री=4 मिनट 297 मिनट= 4 घंटे 57 मिनट

प्रश्न पूछने के समय 3:28 बजे थे। यानि कि इसमें 4 घंटे 57 मिनट को जोड़ दिया तो 8:
25 बजे का समय निकला। मैं उस महिला से बोला कि गाड़ी ठीक 08:25 बजे गया स्टेशन पर पहुंचेगी।
इसके बाद हम दोनों ही गाड़ी के पहुंचने का वेसब्री से इंतजार करने लगे।

ट्रेन ठीक बताए हुए समय पर स्टेशन पर पहुंची तो उस महिला के होश गायब हो गए। उसने मुझे
बड़े ही विस्मित ढंग से देखा और धन्यवाद देकर चली गयी। मैंने गुरु जी का मन ही मन आभार
जताया और अपनी बात सही होने पर खुद ही अपने कंधे ठपथपा लिए।

**– पंकज कुमार**
