# श्रीदेवी जी की आरती (Shridevi Ji Ki Aarti)

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- Published: 2016-03-06T03:54:32+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

### **श्रीदेवी जी की आरती**⏎  **Shridevi Ji Ki Aarti**

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नवरात्र का पावन त्योहार शुरू हो गया है। कहते हैं कि कोई भी पूजा तब तक पूरी नहीं 
मानी जाती है जब तक आरती न की जाए। इसलिए नवरात्र में भी श्री देवी जी की पूजा करने
के बाद आरती करने का विधान है।

जगजननी जय ! जय ! माँ ! जगजननी जय ! जय !
 भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय ! जय !!
जगo

तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरुपा ।
 सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा ।।1।। जगo

आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी ।
 अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी ।।2।। जगo

अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी ।
 कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि, हर सँहारकारी ।।3।। जगo

तू विधिवधु, रमा, तू उमा, महामाया ।
 मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी, जाया ।।4।। जगo

राम, कृष्ण तू, सीता, व्रजरानी राधा ।
 तू वाण्छाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा ।।5।। जगo

दश विद्या, नव दुर्गा, नानाशस्त्रकरा ।
 अष्टमातृका, योगिनि, नव नव रूप धरा ।।6।। जगo

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू ।
 तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू ।।7।। 
जगo

सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या तू शोभाssधारा ।
 विवसन विकट-सरुपा, प्रलयमयी धारा ।।8।। जगo

तू ही स्नेह-सुधामयि, तू अति गरलमना ।
 रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि-तना ।।9।। जगo

मूलाधारनिवासिनि, इह-पर-सिद्धिप्रदे ।
 कालातीता काली, कमला तू वरदे ।।10।। जगo

शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी ।
 भेदप्रदर्शिनि वाणी विमले ! वेदत्रयी ।।11।। 
जगo

हम अति दीन दुखी मा ! विपत-जाल घेरे ।
 हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे ।।12।। जगo

निज स्वभाववश जननी ! दयादृष्टि कीजै ।
 करुणा कर करुणामयि ! चरण-शरण दीजै ।।13।। जगo
