# सट्टा बाजार में किसे लाभ होगा?

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- Published: 2026-08-18T23:11:54+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

ऐसे लोगों की संख्‍या हजारों या कहें लाखों में होगी, जो कह दें कि आज ऐसा होगा, और
उस दिन वैसा हो जाता है। जिन लोगों को क्रिकेट के बारे में मात्र इतनी जानकारी होती
है कि यह बैट बॉल से खेला जाता है और आज अमुक दो टीम खेल रही है, वे भी बहुत सटीकता
से कई बार बता देते हैं कि आज कौनसी टीम जीतेगी। पाठकों को भरोसा नहीं होगा, लेकिन 
मैंने ऐसे लोगों को भी देखा है जो यह बता देते हैं कि अगले ओवर या अगली गेंद में क्‍या
होने वाला है।

परन्‍तु जब बात आती है ऐसे सटीक फलादेशों से कमाने की तो, इनमें से 99 प्रतिशत लोग 
फिसड्डी साबित होते हैं। खुद बता रहे हैं, दूसरे उससे कमा रहे हैं, लेकिन ज्‍यों ही
खुद दांव लगाते हैं, बुरी तरह नुकसान उठाते हैं। चाहे सौ में से मात्र एक प्रिडिक्‍शन
गलत होने के कारण हो या उसी दिन अटपटी स्थितियां बनने से हो, ये जातक खुद खेलते ही 
या तो गलत हो जाते हैं या नुकसान में आ जाते हैं। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग होते हैं जो
स्‍वयं भले ही भविष्‍यवाणी न कर पाते हों, लेकिन किसी भी सामान्‍य पंडित से फलादेश 
लेकर लाखों करोड़ों की कमाई करते हैं… ऐसा कब होता है?

जैसा मैंने पूर्व के लेख में बताया कि हमें इंट्यूशन या कहें अंतर्ज्ञान के लिए पंचम
भाव की आवश्‍यकता होती है। जिन जातकों की पत्रिका में पंचम भाव बहुत अधिक शक्तिशाली
हो, उन जातकों की छठी इंद्री अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय होती है और ऐसे जातकों का अंतर्ज्ञान
भी श्रेष्‍ठ होता है। प्रत्‍यक्षत: यह पंचम भाव जन्‍मपत्रिका के लाभ भाव का ठीक विपरीत
होता है। एकादश भाव को लाभ अथवा आय का भाव कहा गया है। किसी भी भाव से उसका सप्‍तम 
भाव उसका मारक होता है। यानी लग्‍न में जो चीज शुरू होगी, सप्‍तम उसे समाप्‍त करने 
वाला होगा। इसी प्रकार लाभ का सप्‍तम भाव पंचम होता है। इसी कारण पंचम भाव बहुत अधिक
शक्तिशाली होने पर एकादश भाव दब जाता है।

सट्टे में एक और महत्‍वपूर्ण बात होती है, भले ही कालांतर में सट्टे ने संस्‍थागत रूप
ले लिया हो, लेकिन मूल रूप से सट्टा दो लोगों के बीच होता है। एक होता है दांव लगाने
वाला, दूसरा होता है, उस दांव को संभालने वाला। एक तरफ होता है, लगाने वाला, दूसरी 
तरफ होता है खाने वाला। यानी मूल सट्टा दो लोगों का खेल है। जब कोई खेल दो लोगों के
बीच खेला जाता है, तो महत्‍वपूर्ण भाव होते हैं, लग्‍न, षष्‍ठम और एकादश। ऐसा क्‍यों,
क्‍योंकि लग्‍न स्‍वयं जातक को प्रदर्शित करेगा, छठा भाव जातक के प्रतिद्वंद्वी के 
नुकसान या व्‍यय को प्रदर्शित करता है और एकादश स्‍वयं जातक के लाभ के बारे में बताता
है।

सट्टे में किसी दिन जीतने के लिए उस दिन जातक के लग्‍न, षष्‍ठम और एकादश अनुकूल होंगे
और जातक के प्रतिद्वंद्वी के यही तीनों खराब होंगे तो जातक को निश्चित रूप से विजय 
मिलेगी। अब प्रश्‍न आता है कि जातक के प्रतिद्वंद्वी के कैसे देखेंगे कि लग्‍न, षष्‍ठम
और एकादश प्रतिकूल है या नहीं, इसका जवाब मिलता है प्रश्‍न कुण्‍डली में…

किसी विशेष दिन जब प्रश्‍न किया जाए और किसी विशेष परिस्थिति के लिए किया जाए तो पृच्‍छक
के प्रश्‍न पूछते ही प्रश्‍न कुण्‍डली बनेगी और उसमें जातक और उसके प्रतिद्वंद्वी दोनों
की स्थिति स्‍पष्‍ट हो जाएगी। प्रश्‍न के लग्‍न, षष्‍ठम और एकादश से जातक की स्थिति
और प्रश्‍न कुण्‍डली के ही सप्‍तम, द्वादश और पंचम से प्रतिद्वंद्वी की स्थिति पता 
चलेगी। इससे ठीक ठीक बताया जा सकता है कि जातक को उस दिन या किसी विशेष खेल में लाभ
होगा या नहीं….

एक ही सटोरिया लगातार जीतता ही रहे यह भी संभव नहीं है, ऐसे में कौनसा सटोरिया अपेक्षाकृत
अधिक जीतेगा और कम नुकसान में रहेगा, यह जानने के लिए हमें फिर से जातक की मूल जन्‍मपत्रिका
पर लौटना होगा, इस पर विचार हम अगले लेख में करेंगे।

**सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी**
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