# निर्वाण षट्कम Nirvan Shatkam

- Link: https://theastrologyonline.com/nirvan-shatkam/
- Published: 2021-10-12T11:15:28+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

## निर्वाण षट्कम Nirvan Shatkam

**मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम् **

**न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे**

**न च व्योम भूमिर्न तेजॊ न वायु: **

**चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥1॥**

**न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: **

**न वा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोश:**

**न वाक्पाणिपादौ  न चोपस्थपायू **

**चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥2॥**

**न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ **

**मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:**

**न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: **

**चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥3॥**

**न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् **

**न मन्त्रो न तीर्थं न वेदार् न यज्ञा:**

**अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता **

**चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥4॥**

**न मे मृत्यु शंका न मे जातिभेद:**

**पिता नैव मे नैव माता न जन्म:**

**न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: **

**चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥5॥**

**अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ **

**विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्**

**न चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेय: **

**चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥6॥**

 

---

**AUDIO**

 [https://theastrologyonline.com/wp-content/uploads/2021/10/Nirvan-Shatakam.mp3](https://theastrologyonline.com/wp-content/uploads/2021/10/Nirvan-Shatakam.mp3)

[**DOWNLOAD**](https://theastrologyonline.com/wp-content/uploads/2021/10/Nirvan-Shatakam.mp3)

---

### सरल अनुवाद

ना मन हूँ, ना बुद्धि, ना चित अहंकार
 ना जिव्या नयन नासिका करण द्वार ना मन हूँ, ना
बुद्धि, ना चित अहंकार ना जिव्या नयन नासिका करण द्वार

ना चलता ना रुकता ना कहता ना सुनता
 जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता ना चलता ना रुकता 
ना कहता ना सुनता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता

ना मैं प्राण हूँ ना ही हूँ पंच वायु
 ना मुज्मे घृणा ना कोई लगाव ना लोभ मोह इर्ष्या
ना अभिमान भाव धन धर्म काम मोक्ष सब अप्रभाव मैं धन राग, गुणदोष विषय परियांता जगत 
चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता

मैं पुण्य ना पाप, सुख दुःख से विलग हूँ
 ना मंत्र, ना ज्ञान, ना तीर्थ और यज्ञ हूँ
ना भोग हूँ, ना भोजन, ना अनुभव ना भोक्ता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ,
अनादि अनन्ता

ना मृत्यु का भय है, ना मत भेद जाना
 ना मेरा पिता माता, मैं हूँ अजन्मा निराकार साकार,
शिव सिद्ध संता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता

मैं निरलिप्त निरविकल्,प सूक्ष्म जगत हूँ
 हूँ चैतन्य रूप, और सर्वत्र व्याप्त हूँ 
मैं हूँ भी नहीं, और कण कण रमता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ, अनादि 
अनन्ता

ये भौतिक चराचर, ये जगमग अँधेरा
 ये उसका ये इसका, ये तेरा ये मेरा ये आना ये जाना,
लगाना है फेरा ये नाश्वर, जगत थोड़े दिन का, है डेरा ये प्रश्नों, में उत्तर, हुनिहित
दिगंत जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता

ना मन हूँ, ना बुद्धि, ना चित अहंकार
 ना जिव्या नयन नासिका, करण द्वार ना मन हूँ, 
ना बुद्धि, ना चित अहंकार ना जिव्या नयन नासिका, करण द्वार

ना चलता, ना रुकता, ना कहता, ना सुनता
 जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता ना चलता, ना रुकता,
ना कहता, ना सुनता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना हूँ, अनादि अनन्ता जगत चेतना
हूँ, अनादि अनन्ता
