# श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa)

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- Published: 2022-03-04T16:17:50+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

#### **॥ श्रीहनूमते नम:॥**

# **श्री हनुमान चालीसा**

#### **दोहा****

#### **श्रीगुरु चरन सरोज रज****, निज मनु मुकुरु सुधारि।⏎  बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

#### **बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।⏎  बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

#### **॥ चौपाई ॥**

#### **जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।**⏎  **जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥**

#### **रामदूत अतुलित बल धामा।**⏎  **अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥**

#### **महाबीर बिक्रम बजरंगी।**⏎  **कुमति निवार सुमति के संगी॥**

#### **कंचन बरन बिराज सुबेसा।**⏎  **कानन कुंडल कुंचित केसा॥**

#### **हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।**⏎  **कांधे मूंज जनेऊ साजै॥**

#### **संकर सुवन केसरीनंदन।**⏎  **तेज प्रताप महा जग बन्दन॥**

#### **विद्यावान गुनी अति चातुर।**⏎  **राम काज करिबे को आतुर॥**

#### **प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।**⏎  **राम लखन सीता मन बसिया॥**

#### **सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।**⏎  **बिकट रूप धरि लंक जरावा॥**

#### **भीम रूप धरि असुर संहारे।**⏎  **रामचंद्र के काज संवारे॥**

#### **लाय सजीवन लखन जियाये।**⏎  **श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥**

#### **रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।**⏎  **तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥**

#### **सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।**⏎  **अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥**

#### **सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।**⏎  **नारद सारद सहित अहीसा॥**

#### **जम कुबेर दिगपाल जहां ते।**⏎  **कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥**

#### **तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।**⏎  **राम मिलाय राज पद दीन्हा॥**

#### **तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।**⏎  **लंकेस्वर भए सब जग जाना॥**

#### **जुग सहस्र जोजन पर भानू।**⏎  **लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥**

#### **प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।**⏎  **जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥**

#### **दुर्गम काज जगत के जेते।**⏎  **सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥**

#### **राम दुआरे तुम रखवारे।**⏎  **होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥**

#### **सब सुख लहै तुम्हारी सरना।**⏎  **तुम रक्षक काहू को डर ना॥**

#### **आपन तेज सम्हारो आपै।**⏎  **तीनों लोक हांक तें कांपै॥**

#### **भूत पिसाच निकट नहिं आवै।**⏎  **महाबीर जब नाम सुनावै॥**

#### **नासै रोग हरै सब पीरा।**⏎  **जपत निरंतर हनुमत बीरा॥**

#### **संकट तें हनुमान छुड़ावै।**⏎  **मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥**

#### **सब पर राम तपस्वी राजा।**⏎  **तिन के काज सकल तुम साजा॥**

#### **और मनोरथ जो कोई लावै।**⏎  **सोइ अमित जीवन फल पावै॥**

#### **चारों जुग परताप तुम्हारा।**⏎  **है परसिद्ध जगत उजियारा॥**

#### **साधु-संत के तुम रखवारे।**⏎  **असुर निकंदन राम दुलारे॥**

#### **अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।**⏎  **अस बर दीन जानकी माता॥**

#### **राम रसायन तुम्हरे पासा।**⏎  **सदा रहो रघुपति के दासा॥**

#### **तुम्हरे भजन राम को पावै।**⏎  **जनम-जनम के दुख बिसरावै॥**

#### **अन्तकाल रघुबर पुर जाई।**⏎  **जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥**

#### **और देवता चित्त न धरई।**⏎  **हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥**

#### **संकट कटै मिटै सब पीरा।**⏎  **जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥**

#### **जै जै जै हनुमान गोसाईं।**⏎  **कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥**

#### **जो सत बार पाठ कर कोई।**⏎  **छूटहि बंदि महा सुख होई॥**

#### **जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।**⏎  **होय सिद्धि साखी गौरीसा॥**

#### **तुलसीदास सदा हरि चेरा।**⏎  **कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥**

#### **॥ दोहा ॥**

#### **पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।**⏎  **राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥**

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#### **सियावर रामचंद्र की जय**

#### **पवनसुत हनुमान की जय**

#### **बोलो भई सब संतन की जय**

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