# श्रीसंकटनाशनगणेश स्तोत्रम Shri Sankat Nashan Ganesh Strotam

- Link: https://theastrologyonline.com/shri-sankat-nashan-ganesh-strotam/
- Published: 2016-03-06T04:36:10+05:30
- Author: Astrologer Sidharth

## श्रीसंकटनाशनगणेश स्तोत्रम Shri Sankat Nashan Ganesh Strotam

## नारद उवाच

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम ।
 भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये।।
1।।

प्रथमं वक्रतुंण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम ।
 तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।
2।।

लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।
 सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम ।।3।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु गजाननम ।
 एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ।।4।।

द्वादशैतानि नामामि त्रिसन्ध्यं य: पठेन्नर: ।
 न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो।।
5।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम ।
 पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते
गतिम ।।6।।

जपेद गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासै: फलं लभेत ।
 संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।
7।।

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत ।
 तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य 
प्रसादत: ।।8।।

।।इति श्रीनारदपुराणे श्रीसंकटनाशनगणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम।।

![Lord Ganesha](https://theastrologyonline.com/wp-content/uploads/2016/03/received_10205101343321348-
780x1024.jpeg "Lord Ganesha")

**हिन्दी अनुवाद**
 नारद जी कहते हैं – पार्वतीनन्दन देवदेव श्रीगणेश जी को सिर झुकाकर
प्रणाम करके अपनी आयु, कामना और अर्थ की सिद्धि के लिये उन भक्त निवास का नित्यप्रति
स्मरण करें – पहला श्लोक. **2 से 5 तक के श्लोक का हिन्दी अनुवाद **पहला वक्रतुण्ड,
दूसरा एकदन्त, तीसरा कृष्णपिंगाक्ष, चौथा गजवक्त्र, पाँचवां लम्बोदर, छठा विकट, सातवाँ
विघ्नराजेन्द्र, आठवाँ धूम्रवर्णं, नवाँ भालचन्द्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति 
और बारहवाँ गजानन – इन बारह नामों का जो व्यक्ति तीनों संध्याओं (प्रात:, मध्याह्न 
और सायंकाल) में पाठ करता है, हे प्रभो ! उसे किसी भी तरह के विघ्न का भय नहीं रहता
है. इस प्रकार का स्मरण सभी सिद्धियाँ देने वाला होता है. **छठा श्लोक **इससे विद्याभिलाषी
विद्या, धन के अभिलाषी धन, पुत्र की इच्छा वाले पुत्र तथा मुमुक्षु मोक्षगति प्राप्त
कर लेता है. **सातवाँ श्लोक **जो व्यक्ति इस गणपति स्तोत्र का जप करता है, उसे छ: महीने
में मनोवांछित फल प्राप्त होता है और एक वर्ष में पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो जाती है,
इसमें किसी प्रकार का कोई सन्देह नहीं है. **आठवाँ श्लोक **जो पुरुष इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों
को समर्पण करता है, गणेश जी की कृपा से उसे सब प्राकर की विद्या प्राप्त हो जाती है.

> एक विशेष बात यह भी है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन 11 बार नियमित रुप से इसका पाठ करते
> हैं उनके संकट शीघ्र ही टल जाते हैं.
>  इस प्रकार श्रीनारद पुराण में लिखा श्रीसंकटनाशनगणेशस्तोत्र
> सम्पूर्ण हुआ.
