बीकानेर के महाराजा गंगासिंहजी ने एक बार सट्टे पर रोक लगाने के लिए तय किया कि जो भी सटोरिए हैं, उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया जाए। सैनिकों ने तुरंत सटोरियों की धरपकड़ की और उन्हें बीकानेर जेल में डाल दिया गया। कुछ दिन बाद महाराज ने मंत्रीजी से पूछा कि क्यों कि तो शहर में सट्टा बंद हो गया होगा? मंत्रीजी ने कहा कि आप खुद चलकर देख लीजिए, महाराज साहब वेश बदलकर जेल पहुंचे, वहां सींखचों के पीछे से सटोरिए भाव लगा रहे थे कि आज गंगासिंहजी जेल में पधारेंगे…
सट्टा देखने में एक खेल है, लेकिन वास्तव में बहुत से लोगों के लिए यह जीवन पद्धति है। कुछेक सट्टा खेलकर पैसा बना पाते हैं, अधिकांश सट्टे में बर्बाद ही होते हैं, फिर भी सट्टा खेलते ही खेलते हैं। इससे दो महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े होते हैं, पहला कि कौनसा जातक सट्टा खेलने की लत का शिकार हो सकता है और किस जातक को सट्टे से वास्तव में लाभ भी हो सकता है।
जन्मपत्रिका में पंचम भाव को इंट्यूशन से जोड़ा जाता है। पंचम भाव में चंद्रमा, राहु और केतु होने पर जातक का इंट्यूशन सट्टे को लेकर विशेष तौर पर बढ़ जाता है। पंचम का चंद्रमा चाहे क्रिकेट का हो, बारिश का हो या घडि़या हो, खेलने के लिए प्रेरित करता है। जातक को पता चलने लगता है कि आगे ऐसा होने की प्रबल संभावना है, बहुत अधिक बार उसका अनुमान सही भी निकलता है। वहीं राहु होने पर तय नहीं होता, कभी अनुमान आशा से अधिक सटीक होता है और तो कभी अनुमान बिल्कुल गलत बैठता है। अगर पंचम का केतु हो तो शुरूआत में ऐसा सटीक निर्णय बैठता है कि ऐसा लगता है कि खेल ही जातक के कहे अनुसार हो रहा है, लेकिन आगे चलकर पंचम का केतु न केवल गलत होता है बल्कि सटोरिए को यह सोचने की बुद्धि भी नहीं रहने देता कि आगे सट्टा किया जाए या इससे बाहर आया जाए। तीसरे का चंद्रमा जातक को खिलाड़ी प्रवृत्ति देता है, अगर जातक नियमित सटोरिया न भी हो तो कभी कभार दांव लगाने के लिए सट्टा खेल लेता है।
पंचम भाव से चंद्रमा, राहु अथवा केतु का संबंध बहुत अधिक संभावना बनाता है कि जातक सट्टे के खेल की चपेट में आए, अब दूसरा और महत्वपूर्ण प्रश्न है कि सट्टा खेलकर कौन पैसा बना सकता है? इस पर विचार करेंगे अगले लेख में…
सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी
बीकानेर

