रसो वै स:

इस सूत्र का अर्थ है परमात्‍मा रस स्‍वरूप है और यह रस आनन्‍ददायक है। दरअसल मानव शरीर भी रसों से ही बना है और जब तक इन रसों का संतुलित प्रवाह बना रहता है मानव जीवन भी आनन्‍ददायक रहता है। अगर रस में थोड़ा भेद हो जाए तो या तो जीव कष्‍ट में रहेगा या प्रयाण होगा। अनुकूल रस हमें स्‍वस्‍थ और सौभाग्‍यदायक जीवन देता है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन के रस छह प्रकार के हैं। मधुर यानी मीठा, अम्‍ल यानी खट्टा, लवण यानी नमकीन, कटु यानी तीखा या चरपरा, तिक्‍त यानी कड़वा और कषाय यानी कसैला। ज्‍योतिष में इन सभी रसों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले ग्रह हैं और इसी से ज्‍योतिषीय उपचार भी संभव होते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार सूर्य कड़वा, चंद्रमा नमकीन, मंगल तीखा, गुरु मीठा, शुक्र खट्टा, शनि कसैला और बुध मिश्रित रस वाला ग्रह है। मोटे तौर पर यह जानने के बाद हम इनके कारकत्‍वों के आधार पर सभी खाद्य पदार्थों के रसों और उनके आधिपत्‍य ग्रहों का निर्धारण कर सकते हैं। ये कुछ इस प्रकार होंगे…

गेहूं और जौ पर सूर्य का अधिकार है, ज्‍वार पर बुध, चने पर गुरू, बाजरा पर शनि एवं राहु, चावल पर चंद्र और शुक्र, मसूर दाल पर मंगल, मूंग दाल पर बुध, हवेजी पर गुरु, राजमा पर राहु, दानामेथी पर शनि, सांगरी पर शनि, हल्‍दी पर गुरू, धनिया पर बुध, लौंग पर मंगल, इलायची पर बुध, जायफल पर केतु तथा कड़ी पत्‍ता पर मंगल का अधिकार है। रसोई के ही अन्‍य सामान पर देखें तो सौंफ पर बुध, मक्‍की पर गुरू, अमचूर पर शुक्र, जीरे पर सूर्य, राई पर शनि और राहु, हींग पर राहु, नमक पर चंद्रमा, कलौंजी और सेंधा नमक पर शनि का अधिकार है। ड्राई फ्रूट्स पर सामान्‍य तौर पर शनि का अधिकार होता है, क्‍योंकि इन्‍हें सामान्‍य तौर पर सुखाकर बनाया जाता है। सभी ड्राई फ्रूट्स फल ही नहीं होते, कुछ बीज होते हैं और कुछ फल होते हैं। बादाम, काजू, अखरोट, नेजा और पिस्‍ता जहां बीज हैं वहीं खुमानी, किशमिश, खजूर, अंजीर आदि फल हैं। इसके अलावा केसर पुंकेसर है और गूंद एल्‍केलायड्स हैं। इनमें से बादाम पर राहु का अधिकार है, काजू पर शनि, अखरोट पर बुध और अंजीर पर शुक्र का अधिकार होता है।

इनके वर्गीकरण का मुख्‍य आधार रस होता है, इसके साथ ही फल की प्रकृति, उसके रंग, स्‍वरूप और उत्‍पादन की विधियों के आधार पर भी ग्रहों को उनका कारकत्‍व दिया जाता है। जब ज्‍योतिषीय उपचारों की बात आती है, तब यही रस प्रधान तत्‍व हमें शक्तिशाली ज्‍योतिषीय उपचार देते हैं। मसलन राहु जो कि सबसे ज्‍यादा मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाता है, उसके उपचार के लिए बादाम का प्रयोग किया जाता है। मंगल के उपचार के लिए मसूर की दाल के जरिए उपचार करवाया जाता है। हटड़ी के मसालों पर संयुक्‍त रूप से सूर्य का अधिकार बताया जाता है, क्‍योंकि यह भोजन में औषधि की भूमिका का निर्वहन करते हैं।


Astrologer Sidharth

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