
अगर मेरा आधिकारिक परिचय पूछा जाए तो मैं बीकानेर राजवंश के पहले राज ज्योतिषी टीकूजी जोशी के वंश परंपरा में होने के कारण राज ज्योतिषी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी कहलाऊंगा। करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पूर्व बीकानेर के राज परिवार ने टीकूजी जोशी को राज ज्योतिषी के रूप में बीकानेर आमंत्रित किया था। आज उस परिवार के करीब एक हजार सदस्य हैं। भाट जाति के जो लोग राजाओं और राजदरबारियों की वंशावली रखते हैं, मेरे ताऊजी ने उनमें से एक भाट से टीकूजी जोशी की वंशावली निकाली तो हमें अपने पुरखों के बारे में पता चला। मैं टीकूजी जोशी की बारहवीं पीढ़ी का वंशज हूं।
बीकानेर का राजपरिवार जूनागढ़ में ही निवास करता था। अब राजपरिवार जहां रहेगा, उनके दरबारी भी वहीं रहेंगे, सो टीकूजी जोशी के वशंज करीब सौ वर्ष पहले तक जूनागढ़ में ही निवास करते थे। हालांकि परिवार बढ़ने के कारण कुछ परिवार गढ़ में रहते और कुछ परिवार बीकानेर शहर में आकर रहने लगे। आज राजतंत्र समाप्त हो चुका है, उसके बाद भी आज भी जूनागढ़ में हमारे परिवार के कमरों के अवशेष बने हुए हैं। हमारे कुल देवी, कुल देवता, गणेश और भैरव भी जूनागढ़ में ही है। बीकानेर का प्रसिद्ध जूनागढ़ का गढगणेश मंदिर भी हमारे ईष्टदेव लीलरिया गणेशजी ही हैं।
ज्योतिषी परिवार होने के कारण मेरे पिता चिकित्सक होने के बावजूद ज्योतिष में अच्छी दखल रखते थे। हालांकि मैंने अपने पिता को बहुत छोटी उम्र में खो दिया था, लेकिन ज्योतिष विषय के प्रति मेरा रुझान पारिवारिक माहौल से अधिक नैसर्गिक ही रहा। जिस परिवार में मैं रहा, वहां कभी ज्योतिष का नाम भी नहीं लिया जाता था। बीस वर्ष की उम्र में पहली बार ज्योतिष विषय से संपर्क हुआ और तब से आज तक सीखने का सिलसिला जारी है। इन वर्षों में बीकानेर के लगभग सभी प्रख्यात ज्योतिषियों के संपर्क में रहा और सभी वरिष्ठजनों से प्रेम से पास बैठाकर बहुत कुछ सिखाया। मैं उन सभी प्रबुद्ध ज्योतिषियों के प्रति श्रद्धावनत हूं।
हालांकि अब राजतंत्र नहीं है, फिर भी अपनी ब्लडलाइन के कारण वंशानुगत विशेषता और कर्म के प्रभाव से मैं पुन: ज्योतिषी हो चुका हूं और गर्व की बात है कि मैं बीकानेर राजवंश के राज ज्योतिषियों की साढ़े तीन सौ वर्ष पुरानी परंपरा का वाहक हूं।
सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी
बीकानेर
9413156400