कुछ लोगों के लिए यह बहुत ही जरूरी होता है कि वे व्यापार ही करें। ऐसा नहीं है कि उनकी पढ़ाई में कोई कमी रही या वे प्रतियोगी परीक्षा पास नहीं कर सकते, यह सब उनके लिए न केवल आसान होता है बल्कि कई बार प्रतियोगी परीक्षा पास कर लगी नौकरी छोड़कर व्यापार के क्षेत्र में आते हैं। नौकरी में जहां संभावनाएं सीमित होती हैं, वहीं व्यापार में अनन्त संभावनाएं होती है। यह तय करना थोड़ा मुश्किल होता है कि किस प्रकार का व्यापार होगा?
हर किसी सेक्टर में व्यवसाय के इतने अधिक विकल्प होते हैं कि व्यवहारिक तौर पर किसी को यह बताना संभव ही नहीं है कि आप अमुक वस्तु का व्यापार करेंगे। केवल लोहे के सामान के ही कई हजार विकल्प हैं, अगर केवल इतना कह दिया जाए कि लोहे का काम करेंगे तो वह बंदा लोहे के कबाड़ से लेकर टीएमटी सरिया बनाने तक के हजारों कार्य कर सकता है, ज्योतिष के दृष्टिकोण से ठीक ठीक यह बताया ही नहीं जा सकता कि कौन टीएमटी सरिया बनाए और कौन उसी लोहे से तवा बनाएगा।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से व्यापार तीन प्रकार का होता है। पहला है उत्पादन, दूसरा है ट्रेडिग और तीसरा है सर्विसेज। पिछले लेख में हम देख चुके हैं कि व्यापार करने के लिए सप्तम और दशम भाव का संबंध होना चाहिए। अगर कुण्डली में दोनों का संबंध पंचम भाव, एकादश और गुरु से भी हो तो जातक उत्पादन इकाई लगाता है। अगर सप्तम और दशम का संबंध बुध से हो तो जातक विपणन या ट्रेडिंग के क्षेत्र में कार्य करता है, अगर बारहवें भाव से भी संबंध हो जाए तो यह ट्रेंडिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो सकती है। अगर सप्तम और दशम भाव का संबंध शनि तथा छठे भाव से हो तो जातक का मुख्य कार्य सेवा क्षेत्र का होता है।
इन तीनों क्षेत्रों के अलावा एक व्यवसाय स्वरोगजार के रूप में भी होता है, इसमें जातक अपनी सेवा, अपना सीमित उत्पादन, अपनी कला, अपनी दक्षता का उपयोग कर सीमित मात्रा में धनोपार्जन करता है। इसके लिए हमें जातक की स्थिति को भी देखना होता है कि वह व्यापार अथवा भृत्य भाव में से किस ओर अधिक झुका हुआ है।
प्रथम श्रेणी की जन्मपत्रिका हो, प्रथम श्रेणी का राजयोग हो और व्यापार से संबंधित भाव और ग्रह सर्वाधिक अनुकूल स्थिति में हो तो जातक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार या गरीब घर में भी पैदा होकर भी अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक व्यापारिक घराना तक स्थापित कर लेता है।
#astrology #business #finance #money #learn_astrology

