Home Love Astrology प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड मैरिज? Love Marriage or Arranged Marriage?

प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड मैरिज? Love Marriage or Arranged Marriage?

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Love Marriage or Arranged Marriage (प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड मैरिज)
Love Marriage or Arranged Marriage (प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड मैरिज)

प्रेम विवाह होगा या अरेंज मैरिज
Love Marriage or Arranged Marriage

मैं अपनी शादी के बारे में जानना चाहती हूं। प्रेम विवाह होगा या अरेंज मैरिज? मेरे जीवन साथी का काम क्या होगा, व्यापार या नौकरी? (यह सवाल एसएमएस/फोन के द्वारा पूछा गया था)। जो प्रश्न प्राथमिकता में लिया गया है, वो है प्रेम विवाह होगा या अरेंज ?


होररी नंबर: 183 (गुरु-शुक्र-बुध )
(1 से लेकर 249 तक )
कुंडली देखने की तारीख: 05-03-2013 (मंगलवार )
कुंडली देखने का समयः 23:18:05 शाम
कुंडली देखने का स्थान: चेन्नई
13.05 N, 80.17E, तमिलनाडु
रूलिंग प्लेनेट: मंगल-गुरु-केतु-शुक्र-मंगल-शनि-शनि-राहू


चन्द्र से सवाल का स्वभाव पता चलता है। चन्द्र केतू के नक्षत्र और शुक्र के उप में है। चन्द्रमा अष्टम का स्वामी होकर बारहवें भाव में स्थित है। नक्षत्र स्वामी केतु चौथे भाव में स्थित है। केतु मंगल का एजेंट है।

मंगल एकादश और द्वादश कस्प का स्वामी होकर तीसरे भाव में बैठा है। उप स्वामी शुक्र छठे और दशम का स्वामी होकर द्वितीय भाव में स्थित है।शुक्र, बुध के साथ है और बुध सप्तम और नवम का स्वामी है। चंद्रमा का सम्बन्ध (2, 7, 11) भाव से है, इसलिए सवाल वास्तविक है।

शादी के लिए दो,सात,ग्यारह भाव को देखते हैं। एक, छह, दस शादी के लिए ख़राब भाव हैं। (यदि इनके साथ बारह भी हो तो माना जाता है कि जातक की शादी ही न हो, क्योंकि एक, छह, दस भाव का होने का मतलब है कि अलग- अलग रहना या तलाक हो जाना। शुक्र शादी के लिए प्रमुख ग्रह है।

सूत्र: यदि सप्तम कस्प का उप स्वामी दो, सात, ग्यारह के साथ ही पांच का भी सूचक है तो प्रेम विवाह होगा। दो, सात, ग्यारह भाव के संयुक्त दशा भुक्ति अंतर में शादी होती है।

Love marrige or arrenge marriage प्रेम विवाह होगा या अरेंज मैरिज?
Love Marriage or Arranged Marriage (प्रेम विवाह होगा या अरेंज्ड मैरिज)

प्रेम विवाह या अरेंज विवाह?
(Love Marriage Yog in Kundli)

कस्प: (शुक्र-सूर्य-गुरु ) (वृष 01-44-04): उप स्वामी गुरु चन्द्रमा के नक्षत्र में और अपने ही उप में है। गुरु पंचम भाव में है, एक और तीन का स्वामी है। नक्षत्र स्वामी चंद्रमा अष्टम का स्वामी होकर बारहवें भाव में स्थित है। उपस्वामी गुरु अपने नक्षत्र चंद्र के जरिए मजबूती से 12, 8 भाव का सूचक है।

कस्पल उपस्वामी एक, तीन, पांच, आठ, बारह का सूचक है, जिसमें आठ, बारह, प्रेम विवाह के लिए विपरीत भाव हैं। पंचम कस्प 7 या 11 का सूचक नहीं है, लिहाजा जातक का प्रेम विवाह नहीं हो सकता है।

पंचम कस्प: (बुध, गुरु, बुध ) (मिथुन 24-00-00 ): उप स्वामी बुध, राहू के नक्षत्र और सप्तम चन्द्र, बुध सप्तम और नवम का स्वामी होकर दूसरे भाव में स्थित है। बुध के नक्षत्र और उप में कोई ग्रह नहीं है। 1, 7 के कस्प उप का नक्षत्र स्वामी राहू दसम भाव में है। राहू, शनि का एजेंट है। शनि, राहू के साथ दसम भाव में है और द्वितीय कस्प का स्वामी है। उप स्वामी चन्द्र किसी भी ग्रह का नक्षत्र और उप स्वामी नहीं है और चंद्र, केतु के नक्षत्र में है।

केतु, मंगल का एजेंट है और चौथे भाव में स्थित है। मंगल चार, ग्यारह, बारह कस्प का स्वामी होकर तीसरे भाव में स्थित है। 1, 2, 7, 9, 10 का सूचक है और 3, 4, 11, 12, 7 से सम्बंधित है। कस्प उप स्वामी 2, 7, 11 का सूचक है, लेकिन पंचम कस्प से कोई सम्बन्ध नहीं है, इसलिए विवाह तो होगा, लेकिन प्रेम विवाह संभव नहीं होगा।

कस्प उप स्वामी नवम का सूचक है। 9 (पिता संपर्क/सूचना) और तीन का सम्बन्ध भी सूचना से है, चौथे भाव का सम्बन्ध मां से है। अतः अरेंज मैरिज होगी। पिता और माता के रिश्तेदारों के लाए किसी रिश्ते में। विशेष रूप से माता के परिवार से, क्योंकि कस्प उप स्वामी का सम्बन्ध तीन और बारह से होने की वजह से हो सकता है कि शादी घर के पास ही हो या फिर बहुत दूर भी हो सकती है।

पति/पत्नी में उम्र का अंतर देखें तो सप्तम कस्प का उप स्वामी बुध है और बुध के नक्षत्र में कोई ग्रह नहीं है। बुध युवा ग्रह है, इसलिए पति/पत्नी में उम्र का अंतर अधिक नहीं होना चाहिए। अधिक से अधिक दो साल का अंतर होना चाहिये।

जीवन साथी का धंधा-जीवन साथी (पति/पत्नी ) को सप्तम भाव से देखते हैं। जीवन साथी (पति ) का कस्पल उपस्वामी: (मंगल,केतु,शुक्र ) (मेष 02-53-05 ): उप स्वामी शुक्र, राहू के नक्षत्र और अपने ही उप में है।

दसम का शुक्र चार,ग्यारह, बारह कस्प का स्वामी होकर अष्टम भाव में स्थित है नक्षत्र स्वामी केतू दसम में मंगल का एजेंट है मंगल पांच,छह,दस कस्प का स्वामी होकर नौवें भाव में स्थित है उप स्वामी शुक्र किसी ग्रह का नक्षत्र और उप स्वामी नहीं है, राहु के नक्षत्र में है।

राहु चौथे भाव में है और शनि के साथ होने से शनि का एजेंट है, जो चार में है और चार व आठ का स्वामी है। कस्प उप स्वामी 6 (नौकरी) और 10 (प्रोफेशन) का सूचक है और 7 (व्यापार) से संबंधित नहीं है। इसलिए जीवनसाथी सर्विस या प्रोफेशन में होगा या दोनों में होगा, लेकिन बिजनेस नहीं करेगा।

लेखक - नवीन चितलांगिया रुद्र