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मेलापक के लिए ज्योतिषी के पास जाने से पहले | Before we ask Astrologer for Kundli Milan

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मेलापक के लिए ज्योतिषी के पास जाने से पहले | Before we ask Astrologer for Kundli Milan
मेलापक के लिए ज्योतिषी के पास जाने से पहले | Before we ask Astrologer for Kundli Milan

मेलापक के लिए ज्योतिषी के पास जाने से पहले
Before we ask Astrologer for Kundli Milan


एक  दशक पहले तक अभिभावक अपनी संतान के लिए अच्‍छा रिश्‍ता आने पर वर और वधू की कुण्‍डली लेकर ज्‍योतिषी के पास जाते और दोनों कुण्‍डलियां रखकर पूछते कि इन दोनों का मेलापक (Kundli Milan) कैसा है। ज्‍योतिषी जो हां या ना कहते, उसके अनुसार निर्णय कर लिया जाता था। अधिकांश मामलों में वधू खोजने की प्रक्रिया अपनी जाति और अपने क्षेत्र में ही पूरी हो जाती। बहुत थोड़े से मामले ऐसे होते थे जिसमें वधू की तलाश जाति अथवा शहर की सीमाओं को लांघती थी।

कालांतर में संचार साधनों के विकास के साथ बेहतर वधू की तलाश में गोत्र, जाति और कई बार देश की सीमाओं को लांघकर भी पहुंचा जा रहा है। ऐसे में बहुत से विकल्‍प सामने आते हैं। किसी किसी वर या वधू के लिए तो अभिभावक आठ दस कुण्‍डलियां लेकर तक पहुंच जाते हैं। एक च‍िकित्‍सक महोदय ने तो अपने पुत्र के लिए करीब तीन सौ कुण्‍डलियां जुटा ली थी। बाद में जब उन्‍हें बताया कि प्रति मेलापक 1100 रुपए फीस निर्धारित है, तो उन्‍होंने तीन सौ में से पांच ऐसी कन्‍याओं की कुण्‍डलियां निकाली जिनके प्रति उनका परिवार कुछ गंभीर था। दुख की बात यही रही कि 5500 रुपए खर्च करने के बाद भी एक भी कुण्‍डली का मेलापक उनके पुत्र से श्रेष्‍ठ रूप से नहीं बैठ पाया।

ज्‍योतिषी के पास जाने से पहले आप अपने स्‍तर पर अष्‍टकूट गुण का मिलान और मंगल दोष को स्‍वयं जांच कर सकते हैं। ज्‍योतिषी से सलाह फाइनल स्‍टेज के लिए ही ली जानी चाहिए।

कम्‍प्‍यूटर पर ज्‍योतिष सॉफ्टवेयर और मोबाइल पर ज्‍योतिष एप आने के बाद कुंडली मिलान (Horoscope Matching) का आधा काम आसान हो गया है। ऐसे में अगर आप कुण्‍डली मिलान (kundli Milan Services) की इच्‍छा रखते हैं तो शुरूआती अष्‍टकूट मिलान आप अपने स्‍तर पर ही कर सकते हैं। किसी भी मेलापक के कई स्‍तर होते हैं। जो सबसे प्राथमिक भाग होता है, उसे अष्‍टकूट गुण मिलान कहते हैं। इसमें नक्षत्र के आधार पर 36 गुणों का मिलान किया जाता है। इन 36 में से अगर 18 या इससे अधिक गुण मिल रहे हैं तो इसे अच्‍छा मिलान कहा जाएगा। अगर पूरे 36 गुण मिल रहे हों तो इसे भी दोष ही माना जाता है। ऐसे में 18 से 28 गुण के मिलान को सर्वश्रेष्‍ठ की श्रेणी में माना जा सकता है। किसी भी ऑनलाइन एप से इन गुणों का मिलान हो सकता है।

मंगल दोष का मिलान का तरीका भी सरल है, मांगलिक जातक से मांगलिक जातक की कुण्‍डली का मिलान श्रेष्‍ठ और गैरमांगलिक के साथ गैरमांगलिक की कुण्‍डली का मिलान श्रेष्‍ठ माना जाता है। मांगलिक से गैरमांगलिक का मिलान सामान्‍य तौर पर खराब माना गया है। इसे ही मंगलदोष कहा गया है। यानी किसी जातक का मांगलिक होना अथवा न होना मंगलदोष का कारण नहीं है, मेलापक में दोनों का मिलान नहीं होना दोष है।

कुण्‍डली में लग्‍न, चतुर्थ, सप्‍तम, अष्‍टम और द्वादश भाव में मंगल होने पर जातक को मांगलिक की श्रेणी में रखा जाता है। दक्षिण भारत में द्वितीय भाव के मंगल को भी मांगलिक की श्रेणी में माना जाता है, उत्‍तर भारत में इसकी मान्‍यता नहीं है। अगर वर और वधू दोनों की उम्र 28 वर्ष को पार कर चुकी है तो मंगल दोष पर अधिक गंभीरता से विचार करने की जरूरत नहीं है। इस अवधि तक मंगल अपना असर खो देता है।

अगर युवक और युवती प्रेम विवाह (Love Marriage) कर रहे हैं तो भी उन्‍हें कुण्‍डली मिलान (Kundali Matching) अथवा मेलापक (Horoscope Matching) को अधिक गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मेरा निजी अनुभव यह है कि जो युवक अथवा युवती अपने लंबे समय से चल रहे प्रेम संबंध को ज्‍योतिष (Love Marriage yog in Kundli) के बहाने से तोड़ने का प्रयास करते हैं, वही मेलापक (Astrological Kundli Matching) अथवा मंगलदोष को कारण बताते हुए संबंध तोड़ने का प्रयास करते हैं, अन्‍यथा विवाह के आठ प्रकारों में से गंधर्व विवाह यानी प्रेम विवाह में मेलापक की आवश्‍यकता को किसी शास्‍त्र में प्रमाण नहीं दिया गया है। दो लोगों के लंबे समय तक सुखपूर्वक साथ रहने के लिए प्रेम की पर्याप्‍त है। अगर प्रेम में कमी आएगी तभी मेलापक (Kundli Milan) का मुद्दा उछलेगा, अगर दोनों पक्ष राजी हैं तो विवाह होना तय है।

उपरोक्‍त दोनों तीनों प्रमुख स्थितियों को अपने स्‍तर जांचने के बाद जिस रिश्‍ते के लिए गंभीर हो और यह देखना चाहें कि विवाह के बाद वर और वधू के बीच कैसा तालमेल रहेगा, दशाक्रम किस प्रकार सपोर्ट करेगा, दोनों की कुण्‍डलियों में विवाह योग एवं कैरेक्‍टर एनालिसिस के लिए ज्‍योतिषी की सहायता लेनी चाहिए। कई बार ग्रहों की स्थिति, गुरू और शनि का साक्ष्‍य विपरीत होने पर भी ज्‍योतिषी मेलापक (Astrological Horoscope Matching) में आगे बढ़ने के लिए मना कर सकता है। इन गंभीर स्थितियों की जांच के लिए ही ज्‍योतिषी की मदद लेनी चाहिए।

कई बार जातकों का सवाल होता है कि अगर गुण नहीं मिल रहे अथवा मंगलदोष (Mangal Dosh) आ रहा है तो क्‍या इसका कोई उपचार किया जा सकता है?? यहां समझने की बात यह है कि ज्‍योतिष में अगर किसी ग्रह से बाधा आ रही हो तो उसका उपचार किया भी जा सकता है, लेकिन यहां बाधा नहीं है, बल्कि किसी विशिष्‍ट व्‍यक्ति से संबंध बनाने की इच्‍छा है। बाधा इस इच्‍छा के पूरे करने में आ रही है, और ज्‍योतिष में इच्‍छापूर्ति  के लिए उपचार नहीं होते। ऐसे में मेरा स्‍पष्‍ट जवाब होता है कि अष्‍टकूट गुण मिलान नहीं होने पर विवाह टालना चाहिए तथा मंगलदोष होने पर 28 वर्ष की उम्र तक बेमेल विवाह करने से बचना चाहिए।

आखिरी बात : क्‍या श्रेष्‍ठ कुंडली मिलान  के बाद दांपत्‍य जीवन श्रेष्‍ठ रहेगा?

कुंडली मिलान (horoscope matching)  इस बात की गारंटी नहीं है कि कुंडली मिलान (horoscope matching Services)  के बाद दांपत्‍य जीवन भी श्रेष्‍ठ रहेगा। कई बार दोनों जातकों की कुण्‍डली में दांपत्‍य जीवन कठिन रहने की स्थिति होती है, कई बार दोनों में से एक जातक का जीवन कठिन रहने की स्थिति होती है, तो कुछ ऐसी भी स्थितियां होती हैं कि दोनों कुण्‍डलियों के नकारात्‍मक भाव एक दूसरे को खारिज कर देते हैं और दांपत्‍य जीवन श्रेष्‍ठ बन जाता है। एक ज्‍योतिषी श्रेष्‍ठ कुंडली मिलान (Kundli matching) इस कोण से बनाता है कि उपलब्‍ध विकल्‍प में से श्रेष्‍ठ विकल्‍प बताता है और दोनों के गुणों का मिलान करता है। ऐसे में उम्‍मीद यह की जाती है कि वर और वधू एक दूसरे के पूरक हों, चाहे सुखी हों या दुखी।

मुझसे मेलापक  की सेवा लेने के लिए आपको 1100 रुपए फीस जमा करवाकर उसकी रसीद एवं वर तथा वधू का जन्‍म विवरण व्‍हाट्सअप करना चाहिए। सावधानीपूर्वक  विश्‍लेषण (Horoscope Analysis ) के बाद मैं बता सकता हूं कि मेलापक श्रेष्‍ठ रहेगा या नहीं। अधिक जानकारी के लिए देखें… सेवाएं।