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जन्‍माष्‍टमी कब मनाएं? Janmashtami 2020 Date

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जन्‍माष्‍टमी कब मनाएं? Janmashtami 2020 Date
जन्‍माष्‍टमी कब मनाएं? Janmashtami 2020 Date

Janmashtami 2020 Date in India

कालगणना को लेकर भारत में बहुत अधिक संवेदनशीलता है। हालांकि समय के साथ हमने सनातनी पंचांग विक्रम संवत् को धीरे धीरे पूरी तरह अपना लिया है, लेकिन इस पंचांग में भी त्‍योहारों को मनाने को लेकर भेद बना रहता है। खासतौर पर यह कि जन्‍माष्‍टमी कब मनाएं। भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म अष्‍टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और अर्द्धरात्रि में होता है। जब ये तीनों शर्तें पूरी हो रही हों, तभी भगवान श्रीकृष्‍ण के अवतार का जन्‍म माना जाएगा।

इस वर्ष यानी ईस्‍वी संवत् 2020 और विक्रम संवत् 2077 में जन्‍माष्‍टमी 11 और 12 अगस्‍त को मनाई जाएगी। दो दिन जन्‍माष्‍टमी का भेद यह है कि स्‍मार्त संप्रदाय वाले भगवान श्रीकृष्‍ण के भक्‍त अष्‍टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के साथ निशित काल को प्राथमिकता देते हैं। यानी मध्‍यरात्रि का समय, अष्‍टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र होना चाहिए। इनमें से दो शर्तें यानी अष्‍टमी तिथि और निशित काल का समय 11 अगस्‍त को मिलेगा, लेकिन रोहिणी नक्षत्र की शर्त पूरी नहीं होगी।

दूसरी ओर वैष्‍णव संप्रदाय को मानने वाले श्रीकृष्‍ण के भक्‍त इस वर्ष 12 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी मनाएंगे। उन्‍हें अष्‍टमी तिथि सूर्योदय के समय मिलेगी, निशित काल नहीं मिलेगा और रोहिणी नक्षत्र भी 12 अगस्‍त की रात 3 बजकर 25 मिनट से मिलेगा। यानी तकनीकी तौर पर यह मुहूर्त 13 अगस्‍त तक चला जाता है।

श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का उत्‍सव मनाने का सिलसिला ठाकुरजी के भक्‍त 11 अगस्‍त को शुरू कर देंगे जो 12 अगस्‍त की रात्रि तक चलेगा। अगर रोहिणी नक्षत्र का पीछा किया जाए तो उत्‍सव 13 अगस्‍त के सूर्योदय से पहले तक जारी रहेगा।

स्‍मार्त संप्रदाय को मानने वाले अधिक जटिल नियमों को मानते हैं और अष्‍टमी तिथि के साथ निशित काल को अधिक महत्‍व देते हैं, इस कारण उनकी जन्‍माष्‍टमी अष्‍टमी की तिथि में ही मना ली जाती है, वहीं वैष्‍णव संप्रदाय के भक्‍तजनों के लिए सूर्योदय के समय अष्‍टमी तिथि होगी, लेकिन दिन में आगे अष्‍टमी तिथि समाप्‍त हो चुकी होगी, दिन अष्‍टमी ही माना जाएगा, रात्रि में कृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव मनाने के दौरान उन्‍हें अष्‍टमी के बाद की मध्‍यरात्रि बीत जाने के बाद रोहिणी नक्षत्र मिलेगा।

मथुरा में वैष्‍णव पद्धति वाले कृष्‍णभक्‍त अधिक हैं, ऐसे में मथुरा में अधिकांश लोग जन्‍माष्‍टमी (Janmashtami 2020 in Mathura) 12 अगस्‍त को ही मनाएंगे। भगवान श्रीकृष्‍ण से संबंधित अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था इस्‍कॉन भी मुख्‍य रूप से वैष्‍णव संप्रदाय के अधीन आती है। ऐसे में इस्‍कॉन और इससे संबंधित संस्‍थाओं में भी 12 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी उत्‍सव (Janmashtami 2020 Iskcon) का आयोजन किया जाएगा।

मेरा निजी मत है कि अष्‍टमी और मध्‍यरात्रि का निशित काल मिलने पर 11 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी मनाना श्रेष्‍ठ है, काल गणना में नक्षत्र का आगे खिसक जाना कोई अटपटी बात नहीं, जन्‍मोत्‍सव अष्‍टमी के साथ जुड़ा है, सो अष्‍टमी और मध्‍यरात्रि को मानना अधिक श्रेष्‍ठ है। (सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी)

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