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जो मनुष्य भक्ति तथा श्रद्धा भाव से इस गणपतिस्तोत्रम का पाठ नियमित रुप से करता है, स्वयं लक्ष्मी जी कभी उसकी देह-गेह को छोड़कर नहीं जाती हैं.

ऊँ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने ।
दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ।।1।।
लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् ।
अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ।।2।।
ऊँ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रैं ह्रौं ह्र: हरेम्बाय नमो नम: ।
सर्वसिद्धिप्रदोsसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ।।3।।
चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रिय: ।
सिन्दूरारुणवस्त्रैश्च पूजितो वरदायक: ।।4।।
इदं गणपतिस्तोत्रं य: पठेद् भक्तिमान् नर: ।
तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मुंचति ।।5।।

।।इति श्रीगणेशपतिस्तोत्रं सम्पूर्णं।।

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ज्‍योतिषी सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी भारत के शीर्ष ज्‍योतिषियों में से एक हैं। मूलत: पाराशर ज्‍योतिष और कृष्‍णामूर्ति पद्धति के जरिए फलादेश देते हैं। आमजन को समझ आ सकने वाले सरल अंदाज में लिखे ज्योतिषीय लेखों का संग्रह ज्‍योतिष दर्शन पुस्‍तक के रूप में आ चुका है। मोबाइल नम्‍बर 09413156400 (प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्‍ध)