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कुंडली से जानिए जातक पर कोरोना का प्रभाव (Corona’s Effect according to Horoscope)

अपने शोध के आधार पर इस लेख मैं मैंने ये बताने का प्रयास किया है, की कुंडली के कौन से योग एक जातक को कोरोना संक्रमण की अवस्था में किस किस स्तर तक बीमारी को ले जा सकते हैं। और कोरोना के इलाज की अलग अलग अवस्था में कौन से ज्योतिषीय उपाय कारगर हो सकते हैं।

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कुंडली से जानिए जातक पर कोरोना का प्रभाव और कोरोना संक्रमण के दौरान ज्‍योतिषीय उपाय (Corona’s Effect according to Horoscope and Astrological Remedies during Corona Treatment)
कुंडली से जानिए जातक पर कोरोना का प्रभाव और कोरोना संक्रमण के दौरान ज्‍योतिषीय उपाय (Corona’s Effect according to Horoscope and Astrological Remedies during Corona Treatment)

कुंडली से जानिए जातक पर कोरोना का प्रभाव
Corona’s Effect according to Horoscope


  • किस जातक को कोरोना की मार झेलनी पड़ेगी और कौनसा जातक कोरोना संक्रमण को आसानी से झेल जाएगा?
  • किस जातक को अस्‍पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ेगी और कौनसा जातक घर पर ही क्‍वारेन्‍टीन होकर स्‍वस्‍थ हो जाएगा?
  • किस जातक को संक्रमण के बाद लक्षणों का सामना करना पड़ेगा और किस जातक के लिए कोरोना संक्रमण न केवल असरहीन होगा बल्कि लक्षण तक नहीं दिखाएगा?

कोरोना महामारी के शीर्ष के दौरान मैंने स्‍पष्‍ट कर दिया था कि कोरोना महामारी कब समाप्‍त होगी और कितने लोगों को अपनी चपेट में लेगी, मण्‍डेन ज्‍योतिष से इसके बारे में भविष्‍यवाणी करना लगभग असंभव है। बहुत से नए-पुराने ज्‍योतिषियों ने गोचर को देखकर और आने वाले दिनों में बड़े खगोलीय परिवर्तन देखकर अलग अलग ति‍थियों की घोषणा की थी, वे सभी फलादेश कमोबेश फेल साबित हुए। कुछ ज्‍योतिषियों ने अपनी गलती स्‍वीकार की, लेकिन अधिकांश ढिठाई से इसे पचा गए और वापस अपनी जवाबदेही प्रस्‍तुत नहीं की।

अब सवाल यह रह जाता है कि अगर हम इस वैश्विक महामारी के बारे में फलादेश नहीं दे सकते तो ज्‍योतिष किस प्रकार मदद कर सकता है। भारत के अधिकांश ज्‍योतिषी, अगर मैं कहूं कि 99 प्रतिशत ज्‍योतिषी जातक कुण्‍डलियों पर ही शोध और विश्‍लेषण करते हैं। वास्‍तव में जातकों को यही से मदद मिल सकती है। अगर कोई व्‍यक्तिगत रूप से जानना चाहे कि उसे कब संक्रमण हो सकता है, कितना संक्रमण हो सकता है, क्‍या वह अस्‍पताल में भर्ती होगा, क्‍या उसकी मृत्‍यु या गंभीर बीमारी के योग हैं, तो यह जातक कुण्‍डली से स्‍पष्‍ट बताया जा सकता है।

कोविड महामारी शुरू होने से लेकर अब तक नौ महीने में मेरे पास सौ से अधिक मामले आए हैं, खुद मेरा परिवार भी इस महामारी की चपेट में आया। इस दौरान मिली कुण्‍डलियों के विश्‍लेषण से एक पैटर्न दिखाई दिया है। हालांकि सैंपल साइज के तौर पर सौ कुण्‍डलियां बहुत कम संख्‍या है, लेकिन विश्‍लेषण और परिणाम के स्‍तर पर ठोस बातें उभरकर सामने आई हैं।


राहु और चंद्रमा की भूमिका (Rahu and Moon Effect)

कोविड की चपेट में आने वाले 80 प्रतिशत जातकों की कुण्‍डली में दशा, अंतरदशा, प्रत्‍यंतरदशा अथवा सूक्ष्‍म में राहु अवश्‍य आया है। इसके साथ ही सूक्ष्‍म में यानी चार या पांच दिन के लिए राहु और चंद्रमा अवश्‍य दिखाई दिए हैं। जिन जातकों की कुण्‍डली में राहु की महादशा में चंद्रमा की अंतरदशा अथवा चंद्रमा की महादशा में राहु की अंतरदशा रही, उन जातकों को कोविड की गंभीरता का सामना भी करना पड़ा। अगर राहु अथवा चंद्रमा सूक्ष्‍म में आए, उन्‍हें भी चार या पांच दिन के लिए गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा।


मारकेश की भूमिका (Markesh Effect)

जिन जातकों की कुण्‍डली में मारकेश बना हुआ था। यानी द्वितीय, सप्‍तम और अष्‍टम भाव के अधिपति ग्रहों की दशा के साथ बाधकस्‍थानाधिपति की दशा चल रही थी, उन जातकों के कोविड के लक्षण शुरूआती दौर में स्‍पष्‍ट नहीं होने के बावजूद आठवें से चौदहवें दिन के बीच साइटोकिन स्टॉर्म (Cytokine Storm) का सामना करना पड़ा और उसे वे झेल नहीं पाए। जिन जातकों की कुण्‍डली में केवल बाधकस्‍थानाधिपति की दशा, अंतरदशा अथवा सूक्ष्‍म दशा का दौर चल रहा था, उन जातकों का ऑक्‍सीजन लेवल खतरनाक तरीके से नीचे गया और मृत्‍यु के करीब जाकर लौट आए। यानी मृत्‍यु के लिए केवल बाधकस्‍थानाधिपति ही नहीं, बल्कि उसके साथ द्वितीय, सप्‍तम और अष्‍टम भाव का साथ मिलना जरूरी है। अगर केवल बाधकस्‍थानाधिपति का दौर है, तो जातक गंभीर रूप से बीमार होकर पुन: ठीक होने की संभावना बची रहती है। चर लग्‍नों में बाधकस्‍थानाधिपति एकादश भाव का अधिपति होता है, स्थिर लग्‍नों में यह नवम भाव का अधिपति होता है और द्विस्‍वभाव लग्‍नों में सप्‍तम भाव का अधिपति बाधकस्‍थानाधिपति की भूमिका निभाता है।


अस्‍पताल में भर्ती होने वाले (Hospitalized due to Corona Infection)

कोविड की चपेट में आने के बाद किसी भी रोगी की चार अवस्‍थाएं होती हैं। पहली कि वह बिना किसी ठोस लक्षण के पॉजिटिव हो जाए और हल्‍के सर्दी, खांसी और जुकाम के बाद पुन: ठीक हो जाए। दूसरी अवस्‍था होती है कि उसे बुखार आए, शरीर में टूटन हो और हल्‍की खांसी हो। इस अवस्‍था में अस्‍पताल में भी भर्ती हुआ जा सकता है और होम क्‍वारेंटीन (Home Quarantine) भी हुआ जा सकता है। तीसरी अवस्‍था में कोविड (Covid-19) की चपेट में आने से फेफड़े प्राथमिक स्‍तर पर प्रभावित हों और श्‍वास में गंभीर तकलीफ के चलते ऑक्‍सीजन लेवल तेजी से गिरने लगे। ऐसी स्थिति में रोगी को अस्‍पताल में भर्ती करना पड़ता है और ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तहत एंटीवायरल, एंटीबायोटिक और जिंक तथा विटामिन सी लेने होते हैं। ऑक्‍सीजन सपोर्ट इस दौरान लगातार बनाए रखना होता है। यह इलाज तीन से पांच दिन तक का हो सकता है। चौथी अवस्‍था में जातक का श्‍वसन तंत्र इतना बुरी तरह क्षतिग्रस्‍त होता है कि उसे वेंटीलेटर अथवा बाइपेप (BiPap) (यह रोगी को ऑक्‍सीजन देने और खींचने दोनों का काम बाहर से ही करता है) पर लेना पड़ता है, यह बहुत गंभीर स्थिति होती है।

तीसरी और चौथी स्थिति के लिए रोगी को अस्‍पताल में भर्ती किया ही जाता है। जिन जातकों की कुण्‍डली में छठे और बारहवें भाव स्‍पष्‍ट रूप से ऑपरेट हो रहे थे, उन सभी जातकों को शुरूआती तौर पर स्‍वस्‍थ दिखाई देने के बावजूद मैंने अस्‍पताल में भर्ती होने की सलाह दी। ऐसे जातकों की भी दो प्रकार की स्थितियां दिखाई दी। शुरूआती दौर में जहां केवल छठा यानी रोग का घर और बारहवां यानी अस्‍पताल का भाव दिखाई दे रहा था, वहीं सूक्ष्‍म में बाद में बाधक अथवा मारक भाव भी एक्टिव हुए, ऐसे जातक अस्‍पताल से लौटकर नहीं आए। बाकी जिन जातकों के बाधक और मारक ऑपरेट नहीं हुए, वे अस्‍पताल से स्‍वस्‍थ लौटते रहे।


निष्‍कर्ष (Astrological Conclusion for Corona):

  • जिन जातकों की कुण्‍डली में बाधक अथवा मारक के योग बने हुए हैं और वह कोरोना की चपेट में आया है, यहां तक कि पहले दिन से चौदहवें दिन तक अगर सूक्ष्‍म दशा में भी बाधक और मारक योग बन रहे हैं तो ऐसे जातक के मरने की आशंका सर्वाधिक होती है।
  • जिन जातकों की कुण्‍डली में केवल छठा और बारहवां भाव ही चल रहा है, वे जातक गंभीर रूप से बीमार पड़कर भी पुन: ठीक होकर घर लौट सकते हैं।
  • जिन जातकों की कुण्‍डली में महादशा, अंतरदशा, प्रत्‍यंतरदशा और सूक्ष्‍म दशा में राहु और चंद्रमा दोनों आ रहे हैं, ऐसे जातकों के कोविड की चपेट में आने की आशंका सर्वाधिक होती है।
  • अष्‍टम भाव से मोड ऑफ डेथ यानी मृत्‍यु का तरीका छिपा होता है। अगर किसी जातक की कुण्‍डली में अष्‍टम भाव में क्रूर ग्रह विराजमान है, तो वह जातक अधिक लंबे समय तक कोविड से संघर्ष करके मृत्‍यु का वरण करेगा, अगर सौम्‍य ग्रह हैं तो कोविड की चपेट में आने के बाद शीघ्र मृत्‍यु होने की स्थिति बनती है।
  • जिन जातकों की कुण्‍डली में लग्‍नेश, एकादशेश, पंचमेश और नवमेश की दशा, अंतरदशा, प्रत्‍यंतर और सूक्ष्‍म दशा चल रही हो, और वे कोविड की चपेट में आ जाएं तो ऐसे जातक बिना ठोस लक्षण दिखाए पुन: शीघ्र स्‍वस्‍थ हो सकते हैं।
  • जिन जातकों की कुण्‍डली में राहु और चंद्रमा दशाक्रम में आ रहे हों, लेकिन बाधक और मारक न हों तो ऐसे जातक कोविड की चपेट में आने के बाद भी गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ते।
  • पहली बार बुखार आने से लेकर चौदहवें दिन तक जिन जातकों की कुण्‍डली में छठे और बारहवें भाव के अधिपति दशाक्रम में भाग न ले रहे हों तो ऐसे जातक गंभीर लक्षण दिखाने के बावजूद अस्‍पताल का मुंह नहीं देखते, चाहे उनकी मृत्‍यु हो या पुन: ठीक हो रहे हों।

कोरोना संक्रमण के दौरान ज्‍योतिषीय उपाय (Astrological Remedies during Corona Treatment)

  • मारक अथवा बाधक की स्थिति में केवल महामृत्‍युंजय का जप ही एकमात्र उपचार है।
  • जब रोगी का संघर्ष लंबा खिंच रहा हो तो गजेन्‍द्र मोक्ष के पाठ से लाभ लिया जा सकता है।
  • दशाक्रम में राहु और चंद्रमा के कारण कठिन स्थिति बन रही हो तो भैरवजी पर गीला नारियल चढ़ाना लाभदायक साबित हो सकता है।
  • पहले दिन के बुखार से चौदहवें दिन तक अगर लग्‍न, पंचम और नवम का साथ मिल रहा हो तो अपने ईष्‍ट की साधना तुरंत लाभ दे सकती है।



सुधि पाठकों के अनुभव


कोविड के बारे में सिद्धार्थ जी का यह लेख बहुत ही प्रासंगिक है। कोरोना वायरस के प्रसार को अब करीब करीब एक वर्ष हो रहा है। इस बीच कोविड के बारे में तमाम लेख और पोस्ट पढ़ी पर उनमें से अधिकतर कोरी अटकलों पर आधारित लगे। इस लेख की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बहुत ही तार्किक रीति से लिखा गया है। ज्योतिष विद्या का काम लोगों को भयभीत करना नहीं वरन् उन्हें सही दिशा दिखाकर भय एवं सशंय की अवस्था से निकालना है। मैं स्वयं कोविड-19 से पीड़ित हुआ। अपनी एवं पांच-छह अन्य कुंडलियों का मैंने अध्ययन किया। इस लेख में जो भी सूत्र दिये गये हैं, वे मेरे समक्ष आयी संबेधित कुंडलियों में लगभग सटीक उतरे। विशेषकर राहु और चंद्र वाला सूत्र। ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों को बिन मांगे यह सुझाव देना चाहूंगा कि वे इस लेख को को दो-तीन बार पढ़े और इसके सूत्रों को व्यावहारिक उदाहरणों पर लागू करें।

– माधव चतुर्वेदी


Respected Sir,

Gone through your article on Corona on your website. It is excellent and absolutely correct in your observation in correlating Corona and Moon-Rahu Badhkesh (चन्द्र-राहु बाधकेश) etc. I have tested it, I had details of seven people who were diagnosed Corona, admitted to hospital and recovered back. Out of which five people had correlation exactly as stated by you. Details of the other two are yet to receive. Thanks for writing and sharing such a beautiful article.

जैसे की मैने पहले बताया, मेरे पास जिन जातकों को कोरोना हुआ और अस्पताल जाना पडा और बाद मे ठीक हुए, ऐसे कुल आठ जातक है। उन में से चार घर मेंं और चार अस्पताल मेंं जाकर ठीक हुए। सभी जातकोंं मे आप के दिये हुए निरीक्षण सौ प्रतिशत लागू पाये गए। जातक का गुरु अगर ठीक या बलवान था, वे घर से ही ठीक हुए और जिन का मारकेश और चंद्र-राहु और महादशा का बुरा संंबंध स्‍थापित हुआ उन्‍हें  अस्‍पताल जाना ही पडा। लेकिन गुरु अच्छा और बलवान होने के कारण बच गए। अत: आपका निरीक्षण एकदम ठीक है। अब अगर कोरोना संपर्क के कारण होता है तो क्या ये जातक वह टाल सकते थे? तो आपने साधना और पंचम तथा नवम स्थान और उपासना के बारे मे जैसा बताया है, तो मैने ऐसा पाया की उपरोक्त जातक या तो देव धर्म और निजी उपासना मे बहुत ही (न के बराबर) कम आस्था वाले पाए या तो उन के पंचम तथा नवम स्थान खाली पडे पाये। इसके विपरीत कुंडली मे अगर स्थिति होती तो ऐसे जातक बाधित हो कर भी पता नही चला और ठीक भी हुए होंगे। ज्योतिष हिन्दी महासागर से भी गहरा है जितना खोदेंगे उतना कम ही है।

आपका
श्रीरंग कुलकर्णी (सतारा)


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