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विश्वप्रसिद्द बना सकती है राहु की महादशा | Rahu Mahadasha can make you World Famous
विश्वप्रसिद्द बना सकती है राहु की महादशा | Rahu Mahadasha can make you World Famous

विश्वप्रसिद्द बना सकती है राहु की महादशा
Rahu Mahadasha can make you World Famous


किसी भी जातक की कुण्‍डली में शनि, राहु और केतु ऐसे ग्रह हैं जो निश्चित तौर पर नकारात्‍मक परिणाम देते हैं, लेकिन एकमात्र छाया ग्रह राहु में ही यह क्षमता है कि वह जातक को अपनी महादशा (Rahu Mahadasha) के दौरान विश्‍वप्रसिद्ध तक बना सकता है।

एक ओर जहां गुप्‍त कार्य, गुप्‍त मंत्रणा, गुप्‍त स्‍थान, गुप्‍त आकाश राहु के अधिकार में हैं वहीं मिथ्‍या धारणा, मिथ्‍या आकृति, मिथ्‍या साख और यहां तक कि मिथ्‍या ईलाज जिसे मेडिकल की भाषा में प्‍लेसिबो कहते हैं, राहु के अधिकार में माने गए हैं। यानी एक ओर राहु छिपाने की प्रवृत्ति रखता है, वहीं दूसरी ओर अगर कुछ प्रकट करने की विवशता हो तो राहु मिथ्‍या प्रकटन करता है।

इसी क्रम में हम देखते हैं कि फिल्‍में, टेलीविजन, इंटरनेट पर प्रसारित शो, रेडियो पर निकाली गई मिमिक्री आदि भी राहु के अधिकार में आते हैं। जिन जातकों की कुण्‍डली में राहु बलवान होता है, वह अपनी फेक इमेज बनाने में सफल होते हैं। भले ही इन कार्यों में दक्षता राहु देता हो, लेकिन किसी जातक की कुण्‍डली में सफल होने के लिए उसके दशम, चतुर्थ और एकादश भावों की सहायता की भी जरूरत पड़ेगी।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी जातक की कुण्‍डली में चतुर्थ, दशम और एकादश भाव शक्तिशाली हैं और जातक को बुध का साथ मिल रहा हो तो बलवान राहु वाला जातक नाट्य, फिल्‍म अथवा परफार्मिंग आर्ट में बहुत तेजी से तरक्‍की करता है।

ऐसा नहीं है कि राहु के बलवान होने से उसके नकारात्‍मक प्रभाव समाप्‍त हो जाएंगे, लेकिन उन नकारात्‍मक प्रभावों के बावजूद जातक को सफलताएं और प्रसिद्धि मिलती चली जाएगी। भारतीय फिल्‍म इंडस्‍ट्री के प्रमुख सितारों दिलीप कुमार, राजेश खन्‍ना और अमिताभ बच्‍चन के बारे में कहा जाता है कि तीनों ही सितारों ने राहु की महादशा के दौरान अपना स्‍टारडम जिया। हालांकि इसी दौर में तीनों ही सितारों को अपने जीवन की सबसे कठिन दुश्‍वारियां भी झेलनी पड़ी, लेकिन ऑन स्‍क्रीन सफलता और प्रसिद्धी में कहीं कमी नहीं रही। इसके पीछे राहु द्वारा पैदा की गई मिथ्‍या साख या मिथ्‍या छवि की प्रमुख भूमिका रही। गौर करेंगे तो इन सितारों का स्‍टारडम राहु की महादशा की अठारह साल की अवधि के भीतर ही रहा।

इसी प्रकार की मिथ्‍या छवि और गुप्‍त कार्यों के समन्‍वय की आवश्‍यकता राजनीति में भी होती है। साइकोलॉजी के अनुसार किसी भी इंसान के लिए सर्किल और कंसर्न यानी उसके ‘मतलब के विषय और सर्किल’ और ‘इंफ्लूएंस यानी उसके प्रभावक्षेत्र के विषय’ में अंतर होता है। राजनेताओं के मामले में यह अंतर बहुत अधिक होता है। एक राजनेता की वास्‍तविक परास अधिकांशत: अपने राजनैतिक क्षेत्र के भीतर ही प्रभावी होती है। यह एक विधानसभा या एक लोकसभा क्षेत्र हो सकता है। इसी क्षेत्र के भीतर उसे काम करना होता है और उसी क्षेत्र के प्रति वह जवाबदेह होता है, लेकिन बहुत से राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेता अपने सर्किल ऑफ इंफ्लूएंस को राज्‍य अथवा राष्‍ट्रीय स्‍तर तक बढ़ा लेते हैं। साख या कहें छवि का बढ़ा हुआ गुब्‍बारा अधिकांशत: मिथ्‍या ही होता है। इस मिथ्‍या गुब्‍बारे में भरी हवा का आधार राहु ही होता है। जिस राजनेता की कुण्‍डली में राहु फलदायी होता है, वही राजनीति में अपना चेहरा चमका पाता है। सफल या विफल होने की संभावनाएं हम छठे और एकादश भाव से देखेंगे, लेकिन छवि का आकार राहु ही तय करेगा।

लग्‍न (प्रथम भाव) में राहु जातक को माल-ए-मुफ्त दिल-ए-बेरहम बनाता है। यह तथ्‍य हमेशा सही नहीं होता, लेकिन अधिकांशत: जातक का व्‍यवहार मुफ्त की चीजों के प्रति अधिक आकर्षित होता है। कंपनियों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त की स्‍कीमों में से लग्‍न में राहु वाले जातक बिना माल खरीदे स्‍कीम में आ रहे मुफ्त उत्‍पाद को प्राप्‍त करने का प्रयास करते हैं। यह मेरा कई वर्षों का अनुभव है।

द्वितीय भाव में राहु जातक की वाणी को रहस्‍यमयी बना देता है। जातक न झूठ बोलता है न सच, अधिकांशत: ऐसा जातक आपको अर्द्धसत्‍य बोलता हुआ मिलेगा। एक ही बात को सही सही बताते हुए चुपके से उसमें अज्ञात एलीमेंट को इस प्रकार जोड़ देता है कि बात विश्‍वसनीय लगते हुए भी उसके भिन्‍नार्थ बन जाते हैं।

तृतीय भाव में राहु जातक को भीरू बना देता है, चतुर्थ भाव का राहु माता और पैतृक स्‍थान से दूर ले जाता है, पंचम भाव का राहु प्रेम में धोखा दिलाता है, छठे भाव का राहु ऐसे रोग देता है, जिनका चिकित्‍सक प्रथम दृष्‍टया डायग्‍नोसिस या कहें निदान नहीं कर पाते हैं, सप्‍तम भाव का राहु दांपत्‍य जीवन को कठिन बनाए रखता है। अष्‍टम का राहु मृत्‍यु को क्लिष्‍ट बना देता है, यह क्लिष्‍टता किस प्रकार की होगी, जटिलताएं किस प्रकार आएंगी, यह स्‍पष्‍ट कहा नहीं जा सकता। नवम भाव का राहु जातक के भाग्‍य में तीव्र उतार चढ़ाव करता है, चाहे व पीडि़त हो या सफल, लेकिन भाग्‍य कभी इकसार नहीं होता। दशम भाव का राहु जातक को राजनीति और षड़यंत्रों की समझ देता है, ग्यारहवें भाव का राहु जातक को ऐसे कार्यों के लाभ दिलाता है, जिन कार्यों में स्‍पष्‍ट तौर पर कमाई का कोई साधन नहीं दिखाई देता है। बारहवें भाव का राहु जातक के मेहनत से एकत्रित किए गए धन को अचानक खर्च करवा देता है, बिना किसी ठोस कारण के।

अगर आपका राहु बली है तो अनुकूल परिणाम प्राप्‍त करने के लिए बुध को बल देने और राहु को प्रसन्‍न करने के उपचार किए जाने चाहिए और अगर आपका राहु निर्बल और प्रतिकूल है तो उसे शांत करने के लिए तुरंत उपचार शुरू करने चाहिए, इससे पीड़ा बहुत हद तक कम हो सकती है।


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