Home Astrologer Consultant कैसे देखें राशि फलादेश?

कैसे देखें राशि फलादेश?

SHARE
rashi faladesh rashifal daily prediction Astrology Consultancy service Online Kundli Specialist in India

How to read rashi faladesh?

क्‍या आपने आज का राशिफल Dainik rashifal देखा? संभवत: बीते कल, परसों भी देखा होगा, संभवत: हर रोज देखते होंगे। किसी जमाने में केवल समाचारत्रों और मैग्‍जीन में दैनिक राशिफल छपता था, बाद में समाचार चैनलों और संस्‍कार और आस्‍था जैसे चैनलों पर भी नियमित रूप से दैनिक फलादेश दिखाया जाने लगा। जो समाचारपत्र अथवा मैग्‍जीन साप्‍ताहिक, पाक्षिक, मासिक, द्विमासिक, अर्द्धवार्षिक और वार्षिक रहे हैं, वे भी अपनी अपनी आवृत्ति के अनुसार सप्‍ताह, पंद्रह दिन, महीनाभर, दो महीना, छह महीना और सालाना के राशि फलादेश rashi faladesh छापते ही रहे हैं। समाचार पत्रों के ऑनलाइन संस्‍करणों और ज्‍योतिष आधारित वेबसाइट्स पर भी नियमित आने लगा। अब कई सारे यूट्यूब चैनल youtube astrology channel भी रोजाना दैनिक फलादेश जारी करते हैं।

राशिफल में क्‍या होता है?

बारह राशियां होती हैं, मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्‍या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन। इन राशियों के जातकों का दिन कैसे गुजरेगा, सप्‍ताह कैसे बीतेगा, महीने में क्‍या खास है या इस साल क्‍या करने वाले हैं, इस बारे में बताया जाता है। इससे पहले कि मैं अपनी ओर से कोई कठोर शब्‍द कहूं, पहले इन बारह राशियों के भविष्‍य कथन को तर्क की कसौटी पर कसने का प्रयाय करते हैं। मान लीजिए आज का कर्क राशि का भविष्‍यफल kark rashifal किसी समाचारपत्र अथवा वेबसाइट पर इस प्रकार दिया गया है

यह राशिफल किसी ऐरे गैरे ज्‍योतिषी ने नहीं, बल्कि मीडिया में सबसे ज्‍यादा चेहरा चमकाने वाले ज्‍योतिषी बेजान दारूवाला ने दिया है, वह भी दैनिक भास्‍कर समाचारत्र के न्‍यूज पोर्टल पर।

बड़े ज्‍योतिषी हैं, मान लेते हैं कि कर्क राशि वालों का दिन आज ऐसा ही बीतेगा। अब थोड़ी गणना करते हैं कि दुनिया में इस वक्‍त कितने इंसान हैं? Google के अनुसार आज 2020 की शुरूआत में 7 अरब 53 करोड़ इंसान धरती पर विचरण कर रहे हैं। प्रायिकता के सिद्धांत के अनुसार 7 अरब 53 करोड़ लोगों को राशियां आवंटित की जाएं तो कर्क राशि के 62 करोड़ 75 लाख इंसान होंगे। ऊपर दिए फलादेश इन सभी कर्क राशि वाले 62 करोड़ लोगों पर लागू होंगे। आने वाला दिन इन सभी लोगों के लिए वैसा ही बीतेगा, जैसा कि राशिफल में बताया गया है?? मुझे ऐसा नहीं लगता।

भारतीय ज्‍योतिष indian astrology में कहीं भी दैनिक फलादेश का कोई जिक्र ही नहीं है। वास्‍तव में परंपरागत ज्‍योतिष traditional astrology में ऐसी कोई गणना ही नहीं है, जिसमें किसी जातक के दैनिक फलादेश की विधि दी गई हो। अगर आपके पास किसी पंडित की बनाई अथवा कंप्‍यूटर से बनवाई भारतीय गणना वाली कुण्‍डली horoscope हो तो उसे उठाकर देखिएगा, उसमें शुरूआत में कुण्‍डलियां दी गई होंगी। इसमें लग्‍न कुण्‍डली, चंद्र कुण्‍डली, निरयण भाव चलित कुण्‍डली, नवमांश और षोडश वर्ग के अलावा सुदर्शन चक्र और जैमिनी पद्धति की कुछ कुंडलियां मिलेंगी। आखिरी पन्‍नों में आपको दशाक्रम मिलेगा। यह दशाक्रम ही बताता है कि इन दिनों आपका समय अनुकूल चल रहा है या प्रतिकूल। वह भी बहुत स्‍थूल रूप में होता है।

यह दशा सिस्‍टम मूल रूप से ऋषि पाराशर parashar ने दिया है। इसमें एक इंसान की पूर्ण आयु 120 साल मानी गई है और सभी नौ ग्रहों को निर्धारित समय आवंटित किया गया है। सर्वाधिक 20 वर्ष की दशा शुक्र की होती है और सबसे छोटी महादशा सूर्य की 6 साल की होती है। अब इन महादशाओं को और छोटे टुकड़ों में बांटा जाता है, इन्‍हें अंतरदशा कहा गया है। एक महादशा में नौ अंतरदशाएं होती हैं, यानी 20 सालों को नौ भागों में बांटेंगे, मोटे तौर पर पौने दो से तीन साल तक के भाग मिलेंगे। इन अंतरदशाओं को और सूक्ष्‍म रीति से प्रत्‍यंतर और प्राण दशाओं तक तोड़ा जाता है। फिर भी इतने टुकड़े व्‍यवहारिक रूप से संभव नहीं है कि किसी जातक के दैनिक फलादेश तक पहुंचा जा सके। फिर दशा का शुरू और समाप्‍त होना भी सूर्योदय और सूर्यास्‍त के क्रम के साथ हो यह जरूरी नहीं। एक दशा समाप्‍त होकर दूसरी दशा दोपहर दो बजे भी शुरू हो सकती है और शाम छह बजे भी। ऐसे में दैनिक फलादेश की कोई संभावना नहीं।

भारत के पास कुण्‍डली में भाग्‍य पढ़ने के साथ दिनों की गणना करने के लिए हमेशा से दशा सिस्‍टम था, इसे समझना टेढ़ी खीर है। ऐसे में पश्चिम में मूर्ख बनाने वाली ज्‍योतिष तो शुरू हो गई, लेकिन गंभीर विषय के साथ जुड़ी गणित तक वे लोग पहुंच नहीं पाए। ऐेसे में मोटे तौर पर राशियों का विभाजन सूर्य की गति के आधार पर किया और उसी का फलादेश करना शुरू कर दिया। हालांकि इस मामले में भी वे पिछड़ चुके हैं। आज किसी जातक की सूर्य राशि sun sign कन्‍या बताई जाती है, तो वास्‍तव में गणना करने पर वहां सिंह राशि का सूर्य दिखाई देता है, लेकिन भेड़चाल में भारत में भी दैनिक फलादेश शुरू कर दिए गए, बस अंतर इतना आया है कि अंग्रेजी माध्‍यम के समाचारपत्र, न्‍यूज पोर्टल आदि सूर्य राशि यानी sun sign के फलादेश छापते हैं तो हिंदी पट्टी चंद्र राशियों के अनुसार फलादेश छापती है। भरोसा दोनों को ही रत्‍ती भर नहीं है, लेकिन स्‍पेस भरना है तो भरना है।

यह बात कोई रहस्‍य नहीं है, बल्कि इतना ओपन सीक्रेट है कि समाचारपत्रों में पेज चार बनाने वाले खुद इस पर हंसते हैं। बहुत से समाचारपत्र तो पंडितों पर बहुत जोर डालते हैं कि वे आगे के पंद्रह दिन अथवा महीनेभर के दैनिक फलादेश एक साथ ही आफिस में जमा करा जाएं ताकि जरूरत के वक्‍त पंडित का मुंह न देखना पड़े। अगर किसी दिन दैनिक फलादेश न भी पहुंचे तो दिक्‍कत नहीं, पिछले किसी दिन का दैनिक फलादेश Daily Prediction उठाकर, राशियों को आगे पीछे कर लिख देने से आज का दैनिक फलादेश बन जाता है। न तो समाचारपत्र इसे गंभीरता से लेते हैं और न ही इसे पढ़ने वाले।

पिछले बीस साल से अधिक समय से ज्‍योतिष के क्षेत्र में हूं, लेकिन आजतक मैंने एक भी ऐसा इंसान नहीं देखा है जो सुबह फलादेश पढ़कर अपनी दिनचर्या तय करता हो। निन्‍यानवे प्रतिशत लोगों को तो सुबह के नाश्‍ते के बाद याद भी नहीं रहता कि आज के दैनिक फलादेश में क्‍या लिखा था। समाचारपत्र की यह भी खूबी होती है कि दिन ढलने से पहले ही वह कचरे में तब्‍दील हो जाता है, साथ ही 14 या 20 पेज का मैटर भी उसके साथ ही कचरे का भागीदार बन जाता है। यही कचरे की तरह लिखे गए फलादेश का भी हाल होता है।

फिर ऐसा क्‍यों है कि आज आधी सदी से अधिक लंबे समय से समाचारपत्र इसे छापते रहे हैं और लोग इसे पढ़ते रहे हैं। अगर किसी दिन अखबार में दैनिक फलादेश न छपे तो लोग मीडिया हाउस में फोन कर कारण पूछने लगते हैं। इसका ठोस कारण ठीक वही है, जो सुडोकू या क्रॉसवर्ड पजल के छपने का है, समाचारपत्र में हर तरह के इंटरेस्‍ट के लिए एक कोना होता है, अगर वह कोना खाली रह जाए या किसी दूसरी चीज से भर दिया जाए, तो सालों से उस कोने से मानसिक रूप से चिपके लोग असहज हो जाते हैं।

ज्‍योतिष के अनुसार दुनिया में कोई भी दो जातक एक जैसे नहीं हो सकते। यहां तक कि एक ही अस्‍पताल में, एक ही मां की कोख से, एक ही तारीख को कुछ मिनटों के अंतराल से जन्‍मे जुड़वां बच्‍चों का भाग्‍य भी अलग अलग होता है। उन दोनों जातकों के जन्‍म की अलग अलग गणना करने के लिए सूक्ष्‍म गणित की जरूरत होगी, केवल लफ्फाजी की नहीं। फिर कुण्‍डली बनने के बाद दशाओं का क्रम और दशा में अंतरदशा और प्रत्‍यंदशा तक विभिन्‍न ग्रहों का प्रभाव, मित्र, शत्रु, अधिमित्र, अधिशत्रु, तात्‍कालिक मैत्री, गोचर आदि कई आयाम देखकर एक समय अवधि का फलादेश किया जा सकता है, वह भी बहुत हद तक स्‍थूल ही होता है।

एक महीने के दौरान पैदा हुए 62 करोड़ जातकों का एक ही भविष्‍य बता देना ड्राइंगरूम एस्‍ट्रोलॉजी तो हो सकता है, लेकिन प्रोफेशनल कतई नहीं। बातें करने के लिए बढि़या विषय हो सकता है, लेकिन बड़ा दांव खेलने के लिए नहीं।

अगर अब भी आप दैनिक राशिफल Dainik rashifal पढ़ते हैं तो हो सकता है दिमाग वहां पर जड़ हो चुका हो, ज्‍योतिष को भला बुरा कहने के बजाय पहले मीडिया को और बाद में खुद की मानसिक जड़ता से लड़ने का प्रयास करना चाहिए।