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लाल किताब के अनुसार सूर्य के प्रभाव और उपाय (Sun Effect in Various Houses of Kundali according to Lal Kitab)
लाल किताब के अनुसार सूर्य के प्रभाव और उपाय (Sun Effect in Various Houses of Kundali according to Lal Kitab)

सूर्य के प्रभाव और उपाय: लाल किताब के अनुसार
(Remedies for Sun in various houses according to Lal Kitab)

वैदिक ज्‍योतिष के इतर लाल किताब सूर्य ग्रह के कुण्‍डली में पड़ने वाले प्रभावों से उसके लक्षण पहचान करना सिखाती है। Prediction for Sun in house in Hindi according to Lal Kitab हर भाव में सूर्य के स्थित होने पर जातक के जीवन में उसके क्‍या प्रभाव दिखाई पड़ते हैं और उसके क्‍या लक्षण हैं इसके साथ ही प्रस्‍तुत लेख में बताया गया है कि लाल किताब के अनुसार सूर्य के अच्‍छे प्रभावों को कैसे बढ़ाया जाए और खराब प्रभावों को कैसे कम किया जाए।

पूरी कुण्‍डली का विश्‍लेषण करने के दौरान सूर्य की अवस्‍था के अतिरिक्‍त हमें सूर्य पर पड़ने वाली दृष्टियों, उसके साथ बैठे ग्रहों और दो या अधिक ग्रहों के मिलने से होने वाले मसनुई प्रभाव का भी अध्‍ययन करना होता है। यहां केवल सूर्य की भावों में स्थिति से होने वाले प्रभावों को स्‍पष्‍ट किया गया है।

पुराणों के अनुसार सूर्य देवता के पिता का नाम महर्षि कश्यप व माता का नाम अदिति है। इनकी पत्नी का नाम संज्ञा है, जो विश्वकर्मा की पुत्री है। संज्ञा से यम नामक पुत्र और यमुना नामक पुत्री तथा इनकी दूसरी पत्नी छाया से इनको एक महान प्रतापी पुत्र हुए जिनका नाम शनि है।

सूर्य के अशुभ होने पर शरीर में अकड़न आ जाती है। मुँह में थूक बना रहता है। यदि घर पर या घर के आसपास लाल गाय या भूरी भैंस है तो वह खो जाती है या मर जाती है। यदि सूर्य और शनि एक ही भाव में हों तो घर की स्त्री को कष्ट होता है। यदि सूर्य और मंगल साथ हों और चंद्र और केतु भी साथ हों तो पुत्र, मामा और पिता को कष्ट। सूर्य के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति अपना पद भी खो बैठता है।

सूर्य के प्रभाव और उपाय: लाल किताब के अनुसार (Remedies for Sun in various houses according to Lal Kitab)
सूर्य के प्रभाव और उपाय: लाल किताब के अनुसार (Remedies for Sun in various houses according to Lal Kitab)

सूर्य का पहले भाव में फल
Sun in First (1st) House

जातक धार्मिक इमारतों या भवनों का निर्माण और सार्वजनिक उपयोग के लिए कुओं की खुदाई करवाता है। उसकी आजीविका का स्थाई स्रोत अधिकांशत: सरकारी होगा। इमानदारी से कमाए गए धन में बृद्धि होगी। जातक अपनी आंखों देखी बातों पर ही विश्वास करेगा, कान से सुनी गई बातों पर नहीं। यदि सूर्य अशुभ है तो जातक के पिता की मृत्यु जातक के बचपन में ही हो जाती है। यदि शुक्र सातवें भाव में हो तो दिन के समय बनाया गया शारीरिक संबंध पत्नी को लगातार बीमारी देता है और तपेदिक के संक्रमण का भय पैदा करता है। पहले भाव का अशुभ सूर्य और पांचवें भाव का मंगल एक-एक कर संतान की मृत्यु का कारण होगा। इसी प्रकार पहले भाव का अशुभ सूर्य और आठवें भाव का शनि एक-एक करके संतान की मृत्यु का कारण बनता है। यदि सातवें भाव में कोई ग्रह न हो तो 24 से पहले विवाह कर लेना जातक के लिए भाग्यशाली रहता है अन्यथा जातक के चौबीसवां साल विनाशकारी साबित होगा।

सूर्य प्रथम भाव के उपाय (Sun First House Remedy)
  1. 24 वर्ष से पहले ही शादी कर लें।
  2. दिन के समय यौन संबंध न बनाएं।
  3. अपने पैतृक घर में पानी के लिए एक हैंडपंप लगवाएं।
  4. अपने घर के अंत में बाईं ओर एक छोटे और अंधेरे कमरे का निर्माण कराएं।
  5. पति या पत्नी दोनों में से किसी एक को गुड़ खाना बंद कर देना चाहिए।

सूर्य का दूसरे भाव में फल
Sun in Second (2nd) House

यदि सूर्य शुभ है तो जातक आत्मनिर्भर होगा, शिल्पकला में कुशल और माता-पिता, मामा, बहनों, बेटियो तथा ससुराल वालों का सहयोग करने वाला होगा। यदि चंद्रमा छठवें भाव में होगा तो दूसरे भाव का सूर्य और भी शुभ प्रभाव देगा। आठवें भाव का केतू जातक को अधिक ईमानदार बनाता है। नौवें भाव का राहू जातक को प्रसिद्ध कलाकार या चित्रकार बनता है। नवम भाव का केतू जातक को महान तकनीकी जानकार बनाता है। नवम भाव का मंगल जातक को फैशनेबल बनाता है। जातक का उदार च्ररित्र उसके दुश्मनों की बृद्धि को रोकता है। यदि सूर्य अशुभ है तो सूर्य से सम्बंधित चीजों और रिश्तों जैसे पत्नी, धन, विधवाओं, गाय, स्वाद, माँ आदि पर बुरा प्रभाव पडता है। धन और सम्पत्ति को लेकर विवाद होता है। जातक की पत्नी जातक को बिगाडने वाली होगी। यदि चंद्रमा आठवें भाव में और सूर्य दूसरे भाव में हो तो दान में कोई वस्तु नहीं लेनी चाहिए अन्यथा जातक पूरी तरह विनाश को प्राप्त होगा। यदि सूर्य दूसरे, मंगल पहले और चंद्रमा बारहवें भाव में हो तो जातक की हालत गंभीर हो सकती है और वह हर तरीके से दयनीय होगा। यदि दूसरे भाव में सूर्य अशुभ हो तो आठवें भाव में स्थित मंगल जातक को लालची बनाता है।

सूर्य द्वितीय भाव के उपाय (Sun Second House Remedy)
  1. किसी धार्मिक स्थान में नारियल का तेल, सरसों का तेल और बादाम दान करें।
  2. धन, संपत्ति, और महिलाओं से जुड़े विवादों से बचें।
  3. दान लेने से बचें, विशेषकर चावल, चांदी, और दूध का दान नहीं लेना चाहिए।

सूर्य का तीसरे भाव में फल
Sun in Third (3rd) House

यदि सूर्य शुभ है तो जातक अमीर, आत्मनिर्भर और छोटे भाइयों से युक्त होगा। जातक पर ईश्वरीय कृपा होगी और वह बौद्धिक व्यवसाय द्वारा लाभ कमाएगा। वह ज्योतिष और गणित में रुचि रखने वाला होगा। यदि तीसरे भाव में सूर्य अशुभ है और कुण्डली में चन्द्रमा भी अशुभ है तो जातक के घर में दिनदहाडे चोरी या डकैती हो सकती है। यदि नवम भाव भी पीडित है तो जातक के पूर्वज गरीब होंगें। यदि पहला भाव पीडित है तो जातक के पडोसियों का विनाश हो सकता है।

सूर्य तृतीय भाव के उपाय (Sun Third House Remedy)
  1. मां को खुश रखते हुए उसका आशिर्वाद लें
  2. दूसरों को चावल या दूध परोसें
  3. सदाचारी रहें और बुरे कामों से बचने का प्रयास करे

सूर्य का चौथे भाव में फल
Sun in Fourth (4th) House

यदि सूर्य शुभ है तो जातक बुद्धिमान, दयालु और अच्छा प्रशासक होगा। उसके पास आमदनी का स्थिर श्रोत होगा। ऐसा जातक मरने के बाद अपने वंशजों के लिए बहुत धन और बडी विरासत छोड जाता है। यदि चंद्रमा भी सूर्य के साथ चौथे भाव में स्थित है तो जातक किसी नए शोध के माध्यम से बहुत धन अर्जित करेगा। ऐसे में चौथे भाव या दसम भाव का बुध जातक को प्रसिद्ध व्यापारी बनाता है। यदि सूर्य के साथ बृहस्पति भी चौथे भाव में स्थित है तो जातक सोने और चांदी के व्यापर से अच्छा मुनाफा कमाता है। यदि चौथे भाव में सूर्य अशुभ है तो जातक लालची होगा। जातक को चोरी करने और दूसरों को नुकसान पहुचाने में मजा आता है। यह प्रवृत्ति अंततः बहुत बुरे परिणाम को जन्म देती है। यदि शनि सातवे भाव में हो तो जातक को रतौंधी रोग हो सकता है। यदि सूर्य चौथे भाव मे पीडित हो और मंगल दसम भाव में हो तो जातक की आंखों में दोष हो सकता है लेकिन उसकी किस्मत कमजोर नहीं होगी। यदि अशुभ सूर्य चतुर्थ भाव में हो साथ ही चंद्रमा पहले या दूसरे भाव में हो और शुक्र पंचम भाव तथा शनि सातवें भाव में हो तो जातक नपुंसक हो सकता है।

सूर्य चतुर्थ भाव के उपाय (Sun Fourth House Remedy)
  1. जरूरतमंद और अंधे लोगों को दान दें और खाना बांटें।
  2. लोहे और लकड़ी के साथ जुड़ा व्यापार न करें।
  3. सोने, चांदी और कपड़े से सम्बंधित व्यापार, लाभकारी रहेंगे।

सूर्य का पांचवें भाव में फल
Sun in Fifth (5th) House

यदि सूर्य शुभ है तो निश्चित ही परिवार तथा बच्चों की प्रगति और समृद्धि होगी। यदि मंगल पहले अथवा आठवें भाव में हो तथा राहू या केतू और शनि नौवें और बारहवें भाव में हो तो जातक राजसी जीवन जीता है। यदि पांचवें भाव में कोई सूर्य का शत्रु ग्रह स्थित है तो जातक को सरकार जनित परेशानियों का सामना करना पडेगा। यदि बृहस्पति नौवें या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक के शत्रुओं का विनाश होगा लेकिन यह स्थिति जातक के बच्चों के लिए ठीक नहीं है। यदि पांचवें भाव का सूर्य अशुभ है और बृहस्पति दसवें भाव में है तो जातक की पत्नी जीवित नहीं रहती और चाहे जितने विवाह करें पत्नियां मरती जाएंगी। यदि पांचवें भाव में अशुभ सूर्य हो और शनि तीसरे भाव में हो तो जातक के पुत्र जीवित नहीं रहते।

सूर्य पंचम भाव के उपाय (Sun Fifth House Remedy)
  1. संतान पैदा करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
  2. अपनी रसोई घर के पूर्वी भाग में बनाएँ।
  3. लगातार 43 दिनों तक सरसों के तेल की कुछ बूंदे जमीन पर गिराएं।

सूर्य का छठे भाव में फल
Sun in Sixth (6th) House

यदि सूर्य शुभ है तो जातक भाग्यशाली, क्रोधी, सुंदर जीवनसाथी वाला तथा सरकार से लाभ पाने वाला होता है। यदि सूर्य छठे भाव में हो, चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति दूसरे भाव में हों तो परंपरा का निर्वाह करना फायदेमंद रहता है। यदि सूर्य छ्ठे भाव में हो और सातवें भाव में केतू या राहू हो तो जातक के एक पुत्र होगा और 48 सालों के भाग्योन्नति होती है। यदि दूसरे भाव में कोई भी ग्रह न हों तो जातक को जीवन के 22वें साल में सरकारी नौकरी मिलती है। यदि सूर्य अशुभ हो तो जातक का पुत्र और ननिहाल के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पडता है। जातक का स्वास्थ भी ठीक नहीं रहता। यदि मंगल दशम भाव में स्थित हो तो जातक के पुत्र एक एक करके मरते जाएंगे। बारहवें भाव में स्थित बुध उच्च रक्त चाप का कारण बनता है।

सूर्य षष्ठम भाव के उपाय (Sun Sixth House Remedy)
  1. कुल परम्परा और धार्मिक परम्पराओं कड़ाई से पालन करें अन्यथा परिवार की प्रगति और प्रसन्नता नष्ट होती है।
  2. घर के आहाते (परिसर) में भूमिगत भट्टियों का निर्माण न करें।
  3. रात में भोजन करने के बाद दूध का छिड़काव करके रसोई की आग और स्टोव आदि को बुझाएं।
  4. हमेशा अपने घर के परिसर में गंगाजल रखें।
  5. बंदरों को गेहूं अथवा गुड़ खिलाएं।

सूर्य का सातवें भाव में फल
Sun in Seventh (7th) House

सातवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ है और यदि बृहस्पति, मंगल अथवा चंद्रमा दूसरे भाव में है तो जातक सरकार में मंत्री जैसा पद प्राप्त करता है। बुध उच्च का हो या पांचवें भाव में हो अथवा सातवां भाव मंगल से देखा जा रहा हो तो जातक के पास आमदनी का अंतहीन श्रोत होता है। यदि सातवें भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और बृहस्पति, शुक्र या कोई और अशुभ ग्रह ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो तथा बुध किसी भी भाव में नीच का हो तो जातक की मौत किसी मुठभेड में परिवार के कई सदस्यों के साथ होती है। जातक को सरकार की ओर से परेशानियां तथा तपेदित और अस्थमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। आगजनी, सांवलापन और अन्य पारिवारिक कष्ट से आई झुंझलाहट जातक को वैरागी बनने या आत्महत्या करने को मजबूर कर सकती है। सातवें भाव हानिकारक सूर्य हो और मंगल या शनि दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हों तथा चंद्रमा पहले भाव में हो तो जातक को कुष्ट या ल्यूकोडर्मा जैसे चर्मरोग हो सकते हैं।

सूर्य सप्तम भाव के उपाय (Sun Seventh House Remedy)
  1. नमक सेवन की मात्रा को कम करें।
  2. किसी भी काम को शुरू करने से पहले मीठा खाएं और उसके बाद पानी जरूर पियें।
  3. खाना खाने से पहले रोटी का एक टुकड़ा रसोई घर की आग में डालें।
  4. काली अथवा बिना सींग वाली गाय को पालें और उसकी सेवा करें लेकिन ध्यान रहे गाय सफेद नहीं होनी चाहिए।

सूर्य का आठवें भाव में फल
Sun in Eighth (8th) House

आठवें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो उम्र के 22वें वर्ष से सरकार का सहयोग मिलता है। ऐसा सूर्य जातक को सच्चा, पुण्य और राजा की तरह बनाता है। कोई उसे नुकसान पहुँचाने में सक्षम होता। यदि आठवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो दूसरे भाव में स्थित बुध आर्थिक संकट पैदा करेगा। जातक अस्थिर स्वभाव, अधीर और अस्वस्थ्य रहेगा।

सूर्य अष्ठम भाव के उपाय (Sun Eighth House Remedy)
  1. घर में कभी भी सफेद कपड़े न रखें।
  2. दक्षिण मुखी घर में न रहें।
  3. हमेशा किसी भी नए काम शुरू करने से पहले मीठा खाकर पानी पिएं।
  4. यदि सम्भव हो तो किसी जलती हुई चिता में तांबे के सिक्के डालें।
  5. बहते हुए पानी में गुड़ बहाएं।

सूर्य का नौवें भाव में फल
Sun in Ninth (9th) House

नवमें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो जातक भाग्यशाली, अच्छे स्वभाव वाला, अच्छे पारिवारिक जीवन वाला और हमेशा दूसरों की मदद करने वाला होगा। यदि बुध पांचवें घर में होगा तो जातक का भाग्योदय 34 साल के बाद होगा। यदि नवमें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो जातक बुरा और अपने भाइयों के द्वारा परेशान किया जाएगा। सरकार से अरुचि और प्रतिष्ठा की हानि।

सूर्य नवम भाव के उपाय (Sun Ninth House Remedy)
  1. उपहार या दान के रूप में चांदी की वस्तुएं कभी स्वीकार न करें। चांदी की वस्तुएं अक्सर दान करते रहें।
  2. पैतृक बर्तन और पीतल के बर्तन नहीं बेचना चाहिए बल्कि इन्हें हमेशा इस्तेमाल करना चाहिए।
  3. अत्यधिक क्रोध और अत्यधिक कोमलता से बचें।

सूर्य का दसवें भाव में फल
Sun in Tenth (10th) House

दसम भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ हो तो सरकार से लाभ और सहयोग मिलता है। जातक का स्वास्थ्य अच्छा और वह आर्थिक रूप से मजबूत होता है। जातक को सरकारी नौकरी, वाहनों और कर्मचारियों का सुख मिलता है। लेकिन जातक हमेशा दूसरों पर शक करता है। यदि दसम भाव में स्थित सूर्य हानिकारक हो और शनि चौथे भाव में हो तो जातक के पिता की मृत्यु बचपन में हो जाती है। सूर्य दसम भाव में हो और चंद्रमा पांचवें घर में हो तो जातक की आयु कम होती है। यदि चौथे भाव में कोई ग्रह न हों तो जातक सरकारी सहयोग और लाभ से वंचित रह रह जाएगा।

सूर्य दशम भाव के उपाय (Sun Tenth House Remedy)
  1. कभी भी काले और नीले कपडे न पहनें।
  2. किसी नदी या नहर में लगातार 43 दिनों तक तांबें का एक सिक्का डालना शुभतादायक रहेगा।
  3. मांस मदिरा के सेवन से बचें।

सूर्य का ग्यारहवें भाव में फल
Sun in Eleventh (11th) House

यदि ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ है तो जातक शाकाहारी और परिवार का मुखिया होगा, उसके तीन बेटे होंगे औए उसे सरकार से लाभ मिलेगा। ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य यदि शुभ नहीं है और चंद्रमा पांचवें भाव में है तथा सूर्य पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो यह जातक की आयु को कम करने वाली होती है।

सूर्य एकादश भाव के उपाय (Sun Eleventh House Remedy)
  1. मांस और शराब से बचें।
  2. रात में सोते समय बिस्तर के सिरहने बादाम या मूली रखकर सोएं और अगले दिन इसे किसी मंदिर में दान कर दें इससे आयु और संतान सुख में बॄद्धि होती है।

सूर्य का बारहवें भाव में फल
Sun in Twelfth (12th) House

यदि बारहवें भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक 24 साल के बाद अच्छा धन कमाएगा और जातक का पारिवारिक जीवन अच्छा होगा। यदि शुक्र और बुध एक साथ हों तो जातक को व्यापार से लाभ मिलता है और जातक ले पास आमदनी के नियमित स्रोत होते हैं। यदि बारहवें भाव का सूर्य अशुभ हो तो जातक अवसाद ग्रस्त, मशीनरी से आर्थिक हानि उठाने वाला और सरकार द्वारा दंडित किया जाने वाला होगा। यदि पहले भाव में कोई और पाप ग्रह हो तो जातक को रात में चैन की नींद नहीं आएगी।

सूर्य द्वादश भाव के उपाय (Sun Twelfth House Remedy)
  1. हमेशा अपने घर में आंगन रखें।
  2. धार्मिक और सच्चे बनें।
  3. घर में एक चक्की रखें।
  4. अपने दुश्मनों को हमेशा क्षमा करें।

अन्य सभी ग्रहों के लिए लाल किताब के अनुसार कुंडली के सभी भावों मे प्रभाव एवं उपाय जानने के लिए निम्न लेख पढे।

  1. Lal Kitab Remedies for Moon in Hindi (लाल किताब के अनुसार चंद्रमा के सभी भावों में उपाय)
  2. Lal Kitab Remedies for Mars in Hindi (लाल किताब के अनुसार मंगल के सभी भावों में उपाय)
  3. Lal Kitab Remedies for Mercury in Hindi (लाल किताब के अनुसार बुध के सभी भावों में उपाय)
  4. Lal Kitab Remedies for Jupiter in Hindi (लाल किताब के अनुसार गुरु के सभी भावों में उपाय)
  5. Lal Kitab Remedies for Venus in Hindi (लाल किताब के अनुसार शुक्र के सभी भावों में उपाय)
  6. Lal Kitab Remedies for Saturn in Hindi (लाल किताब के अनुसार शनि के सभी भावों में उपाय)
  7. Lal Kitab Remedies for Rahu in Hindi (लाल किताब के अनुसार राहु के सभी भावों में उपाय)
  8. Lal Kitab Remedies for Ketu in Hindi (लाल किताब के अनुसार केतु के सभी भावों में उपाय)