कुंडली विश्लेषण (Horoscope Analysis)
आपके टीके के आगे सब फीके : Tantra Mantra yantra
आपके टीके के आगे सब फीके : Tantra Mantra Yantra
सफेद गुंजा की जड़ को घिस कर माथे पर तिलक लगाने से आपके नेटवर्क में...
ज्योतिषीय उपाय (Astrological Remedies)
लय से बनें भाग्यशाली rhythmic good luck
लय से बनें भाग्यशाली rhythmic good luck
प्रकृति (nature) की अपनी लय होती है। अगर इंसान प्रकृति की लय के साथ ताल मिलाकर चले तो...
गुरू (बृहस्पति) की दशा का प्रभाव और फल (Guru / Jupiter...
गुरू की दशा (Guru Mahadasha and Antardasha) को समझने से पहले गुरू की प्रकृति को और उससे पहले की राहु की महादशा और उसके...
शनि की दशा का प्रभाव और फल (Shani Mahadasha Effects and...
शनि की महादशा का प्रभाव और फल
(Shani Mahadasha Effects and Remedy)
एक वरिष्ठ ज्योतिषी मुझसे मिलने आए, कुछ देर की बातचीत के बाद एक पुराने...
दिमाग तेज चलाने के उपाय | Remedies to improvise Brain Functioning
दिमाग तेज चलाने के उपाय
Remedies to improvise Brain Functioningबढ़ती उम्र के साथ ज्यादा सोने, गलत आदतें, अत्यधिक सहवास, किसी भी प्रकार का नशा, तंबाकू...
अपने अनुकूल देवता के बारे में जानें
जातक कुण्डली के अनुसार हर जातक का अनुकूल देवता या कहें ईष्ट होता है। इस ईष्ट का निर्धारण करने की पुरानी विधि अवकहड़ा चक्र...
गुरु (बृहस्पति) महादशा के उपाय के लिए जैन मंत्र (Jain Mantra...
गुरु (बृहस्पति) महादशा के उपाय के लिए जैन मंत्र
(Jain Mantra for Jupiter Mahadasha Remedy)
धनु, मीन, सिंह और मेष लग्न में अधिकांश स्थितियों में गुरू...
वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology)
श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम
श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णक: ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक: ।।1।।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन: ।
द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छृणुयादपि ।।2।।
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य...
शनि महादशा के प्रभाव और उपाय (Shani Mahadasha Effects and Remedy)
शनि महादशा के प्रभाव और उपाय
(Shani Mahadasha Effects and Remedies)
ज्योतिषीय कोण से देखा जाए तो शनि भगवान सूर्य नारायण और उनकी पत्नी छाया के...
श्रीसंकटनाशनगणेश स्तोत्रम Shri Sankat Nashan Ganesh Strotam
श्रीसंकटनाशनगणेश स्तोत्रम Shri Sankat Nashan Ganesh Strotam
नारद उवाच
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।1।।
प्रथमं वक्रतुंण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम ।
तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ।।2।।
लम्बोदरं...













































